Accepting Miracles | Mindful Matters | Ishan Shivanand

Ishan Shivanand teaches that acceptance is the key to transformation, using the metaphor of a mirror becoming a window to show how perception shifts. He emphasizes patience and recognizing your divine origin, positioning acceptance of miracles as the pathway to spiritual awakening.
Chapters
नमश्ुवायआप सब को, आप सबके भीतर के भगवान को मेरा प्रणाम, मैं प्रार्थना करता हूँ। आप सब जहाँ कहीं भी हैं, खुश हैं और आपके भीतर मेरे भगवान की शक्ति प्रवाहित है। आ वेल्कम यु तो टुडेज माइनफुलमैटर्स बहुत अच्छे शंभर के लिए सीधे बैठ जाएं, पीठ सीधी गर्दन सीधी आँखें बंद आँखें बंद करके 3 गहरी सांस, पहली सांस भीतर सांस बहार धन्यवाद भगवान शिव शिवा का, दूसरी सांस भीतर सांस बाहर, धन्यवाद सभी सिद्धों का, तीसरी सांस भीतर सांस बाहर और धन्यवाद शक्ति तत्व का बिल्कुल शांत हो जाएं। और मनीमन भाव कि मैं तैयार हूँ। जिस प्रकार से 1 बीच के भीतर 1 बदलाव उत्पन्न होता है, इससे बीज पौधे में परिवर्तित होता है। मैं तैयार हूँ उस बीज के समान जिस प्रकार से सूर्य की कृपा प्राप्त करने के बाद 1 फुल खेलता है। मैं तैयार हूँ उस फू पूल के समान जिस प्रकार से बर्फ़पिगलती है, मैं तैयार हूँ उस बर्फ के समान, मैं स्वीकार करता हूँ आज से मेरा जीवन बदलने वाला है। बदलेगा शिव अनंत शिव कृपा अनंतता में अपने भगवान की शक्ति को प्राप्त कर अपना जीवन बदलने के लिए तैयार हूँ। गहरी सांस भीतर बहुत अच्छे धीरे धीरे वापस आए उंगलियों को हिलाएं, हथेलियों को रगड़ें और अपने चेहरे को स्पर्श करते हुए सभी लोग अपनी आँखें खोल दे। ब्लेसियो बहुत समय पहले की बात है 1 साइंस बिन साइंस का शिविर हो रहा था जिसमे बाबाजी शिवयोग के रहस्य केवल वैज्ञानिकों के साथ शेयर करते क्यूंकि बहुत सारे विद्याय हैं बहुत सारा ज्ञान है लेकिन कुछ ज्ञान सबके लिए नहीं है, कुछ ज्ञान उनके लिए है जो तैयार हैं, जो काम कर रहे हैं, जो मेहनत कर रहे हैं और अगर आप देखो तो शिवयोग का ज्ञान है। वो तो बहुत ही शक्तिशाली है और उसमें से कुछ रहस्य बाबाजी साइंस पे साइंस में सभी चिकित्सकों को सिखा रहे थे और लंच ब्रेक में 1 चर्चा शुरू हुई और उस चर्चा में मैं भी था और उस चर्चा में बात ये हो रही थी कि कितना समय लगता है 1 व्यक्ति को स्वास्थ प्राप्त करने में, कितना समय लगता है 1 व्यक्ति को अपना जीवन बदलने में, क्योंकि मेरी सोच यह थी कि अगर बीमारी 10 साल पुरानी है तो कम से कम 1 साल तो लगना चाहिए न, अगर दुख कई साल पुराना है तो कुछ महीने तो लगने चाहिए। अगर समस्या पीड़ा आदत कई साल पुरानी है तो कुछ समय तो लगना ही चाहिए तभी तो आप बदलोगे हम सब इंतजार करते हैं उस कैटलिस्ट का, उस ट्रेनिंग पीरियड का जिसके बाद हमारा जीवन बदल जाएगा। लेकिन जब चिकित्सकों से बात हो रही थी तो उसमें से 1 ऑन कॉलेजिस थी। वर्ल्ड नो रेप्यूटेड और उसने कहा कि कभी कभार बीमारी से स्वास्थ्य तक का सफ़र बहुत छोटा होता है। उसने समझाने की कोशिश की कि 1 प्रक्रिया है जिसको वो कहती हैं स्पोन्टेनियस रमिशन और उसने समझाया कि स्पोन्टेनियस परमिशन का मतलब है कि आज आप बीमार हो कल नहीं बस इतना सा कि आज आपके भीतर 1 समस्या थी और कल कुछ हो गया कुछ हो गया। आपके भीतर कुछ आपके सेलुलर बिहेवियर में चेंज आया, कुछ आपके डीएनए में एक्टिवेशन हुई, आप बदल गए, अब आप रिकवरी की ओर रवाना हो गए। पहले बीमार थे, पहले प्रोग्रेसिव डीजनरेटिव डिसार्डर था, पहले रोज जब जी रहे थे, तो आपका शरीर का 11 हिस्सा मर रहा था। लेकिन अब कुछ ऐसा बदलाव हो गया है कि अब शरीर ने खु को रिवाइव करना शुरू कर दिया, रिजुवनेट करना शुरू कर दिया, रिकवर करना शुरू कर दिया। और अब हर शण जब आप जी रहे हैं, अब स्वास्थ्य की ओर, सफलता की ओर, खुशी की ओर बढ़ रहे हैं। उसने कहा कि ये ये जो है, ये प्रक्रिया, इसको हम कहते हैं, स्पोंटेनियस मिशन। और ये शं भर में होती है। फिर ऐसा नहीं है कि 10 साल की बीमारी को 1 साल लग जाएगा। बदलने में ये कण भर में, शण भर में आपका जीवन बदल जाएगा। और इसलिए जब शिविर होता है, मैं हर बार लोगों को याद करता हूँ, हर कण, हर कण, शिवमय ह हो रहा है। ताकि लोगों को भी समझ। आए, जो शिविर करने आते है। आपका अहंकार कहेगा कि मेरी बीमारी बहुत शक्तिशाली है, बहुत ताकतवर है, कई महीने लग जाएंगे, लेकिन विज्ञान भी कहता है। स्पोन्टेनियस रेमिशन, आज आप बीमार हो, कल आप स्वस्थ 1 क्षण लगेगा, 1 दिन लगेगा और आपका शरीर डीजनरेटिव डिसॉर्डर से रिकवरी की ओर चलना शुरू कर देगा। न जाने क्यों लोग अपनी बीमारी से भी अपना अहंकार जोड़ लेते हैं। बेजान की बात है, जान की बात है, आप खुद सोचो, न जाने कितनी बार मैं बीमारों को देखता हूँ। और जैसे आप किसी से बात करते हो, आप उनको बताते हो कि मेरा नाम ये है, वो बताते है कि मेरी पहचान ये है और पहचान क्या है। बीमारी 1 समय पहले 1 पिक्चर देखी थी, मैंने पिक्चर का नाम था जेम्स बॉन्ड और जब पिक्चर शुरुआत होती है, वह व्यक्ति अपनी पहचान बताता है। माई नेम इज बॉन्ड, जेम्स बॉन्ड और जैसे बॉन्ड अपनी पहचान बताता है, वैसे ही अगर मैं किसी बीमार से बात करूँ। वो बीमार भी अपनी पहचान बताता है। जैसे बॉन्ड कहता है, आई एम बॉन्ड, जेम्स बॉंड, उसे बीमार कहता है, हम बीमार, बहुत बीमार, उसकी पहचान ही उसकी बीमारी हो जाती है। वो जब गूगल, पे कुछ भी खोजता है, अपनी बीमारी खोजता है, वो यूट्यूब पे कुछ भी खोजता है, अपनी बीमारी रिलेटेड खोजता है। जब सौ लोगों की भीड़ में उसको छोड़ दिया जाए तो अपनी बीमारी की बात करता है और उसी की बीमारी के भीतर। he finds a group, because when he says oh i am in pan, i am in sickness and somebody else says i am इन पेन, i m इन सिकनेस एंड सडनली, there is a unification, there is a common ground, there is something to talk about otherwise, hes, ninite his disease, and that is it, he has lost his identity। और फिर वो व्यक्ति जब ाता है, साधना करने और साधना कहती है कि जो आइडेंटिटी तुमने अपनी बनाई है, व शन भर में चली जाएगी, शन भर में तुम्हारा जीवन बदल सकता है। वो व्यक्ति घबराता है कि मैंने इतने साल लगा के 1 सबकांशस का निर्माण किया, 1 साइकोलॉजी का निर्माण किया, 1 आइडेंटिटी का निर्माण किया। और तुम न भर में मुझसे। मेरी आइडेंटिटी छीन लोगे। तुम मुझे कहते हो कि शन भर में मैं ठीक हो सकता है, चाहे तुम वैज्ञानिक हो या संत। क्योंकि संत भी कहता है, शिवानंत, शिव कृपा, अनंता, वैज्ञानिक भी कहता है स्पोंटेनियस मिशन। और जो बीमार है, वो कहता है, दिस इस माई आडेंटिटी, यही तो मेरा दुख है, यही तो मेरी समस्या है। इस पर तो मैं गाता लिख सकता हूँ, मैं कविता लिख सकता हूँ। और तुमने अगर ये मुझसे छीन ली। यू हाव। taking over my struggle, what i i if i m, not said in six? और फिर युद्ध शुरू होता है। और तुम कहोगे युद्ध कैसे शुरू हो सकता है? हर व्यक्ति ठीक होना चाहता है, हर व्यक्ति स्वस्थ होना चाहता है, लेकिन तुम भूल रहे हो। मनोवैज्ञानिक कहते हैं की 1 प्रक्रिया है जिस प्रक्रिया का नाम है कॉर्गनटिवडिसोनेंस और कोर्गिनेटिव डिसोनेंस का। मतलब सिर्फ यह है कि अगर मैं 1 सोच लेकर बैठा हूँ, 1 सच लेकर के बैठा हूँ, और वो सच कोई मुझसे छीन ले, तो वो मेरे कतल के समान है। 1 होता है शारीरिक कतल, शारीरिक कतल में ज्यादा पीड़ा नहीं होती। 1 बार शरीर को तुम मार, 2 शरीर खत्म हो गया, 1 होता है मानसिक कतल, मानसिक कतल का। मतलब 1 सच में लेकर के बैठा हूँ। अगर उस सच का तुमने संघार कर दिया, तो वह पीड़ा बार बार होगी, हर रोज होगी, जिसको मनोविज्ञान कहता है, कोगनेटिव डेसेंस कि मैं 1 सच लेकर के बैठा हूँ, और तुम उस सच का संहार नहीं कर सकते। कॉगनेटिव डिस्नेंस तब हो सकती है जब मेरा सच हो कि मैं बीमार हूँ, मैं असहाय हूँ, और कोई आके मुझको बोले कि तुम तुम शक्तिशाली हो, तुम ताकतवर हो, तुममें ऊर्जा है। और शन भर में तुम्हारा जीवन बदल जाएगा। तो 1 संघार है तुम्हारे मन का, क्योंकि तुम्हारे मन ने तो तुम्हे कितनी सारी बातें समझाई है, कितना सिखाने की कोशिश की है कि तुम कमजोर हो, तुम असहाय हो, तुम से नहीं हो पाएगा, तुम्हारी बीमारी ताकतवर है, तुम्हारी आदत ताकतवर है, तुम्हारी कमजोरी ताकतवर है, तुम्हारा कर्जा ताकतवर है। और यहाँ पे 1 सिद्ध आता है अपना चाकू ले कर के, अपनी शक्ति लेकर के, तुम्हारे सच का संघार करने। और कहता है कि तुम शक्तिशाली हो, शिव, अनंत, शिव कृपा, अनंता और हर कण, हर कण शिवमय हो सकता है औ। और उस समय तुम कहोगे कि ऐसा कैसे और हाँ कोगनेटिव डिसोनेंसहै। हाँ, शन भर में तुम्हारे सच का संहार हो जाएगा। लेकिन उस समय तुम्हें डरना नहीं है। न जाने कितने लोग हैं जो अपने कोनेटिवडिसोनेंस को पकड़ के चलते रहते हैं और कहते हैं कि जी, यह मेरा सच है। और मेरे सच से मुझे कोई भटका नहीं सकता। तुम क्यों नहीं समझते, यह अहंकार का ही 1 स्वरूप है। अहंकार ही तो हुआ न। प्रकृति में क्या स्थाई है, केवल 1 ही प्रक्रिया और वो है। बदलाव। तो तुम कैसे कह सकते हो कि मेरा सच भी स्थाई है। अगर हर चीज बदल रही है, तो तुम्हारा सच भी बदलेगा। जो आज सच था, कल सच नहीं। जब मैं छोटा था, तो कम्प्यूटर कितने बड़े होते थे, टीवी कितने बड़े होते थे। और आज देखो इतने पतले, एकदम सुडोल वो। तब सच था। आज का सच अलग है। तुम सच को पकड़ के चल नहीं सकते। तुम ये नहीं कह सकते कि ये यही मेरा सच है। और जिंदगी भर यही मेरा सच रहेगा। प्रकृति में इकलौती स्थायी वस्तु है। बदलाव, आज तुम दुखी हो, कल? तुम दुखी नहीं, जीवन बदलता है, सोच बदलती है। और तुम्हे उस बदलाव को कभी न कभी तो स्वीकार करना होगा। और तुम कहोगे कि कैसे मैं उस बदलाव को स्वीकार कर लूं। मैं तो वही का वही हूँ, मैं तो वही हूँ। जब मैं आईने में देखता हूँ, मेरा मेरा चेहरा तो वही है। मेरे सर पर कोई मुकुट नहीं आ गया, मेरे माथे पर अर्धचंद्र नहीं आ गया, मेरे बगल में त्रिशूल नहीं मैं तो वही का वही हूँ। तब मैं तुम्हें यह कहना चाहता हूँ कि कभी तुम देखना 1 आईने में और 1 खिड़की में ज्यादा फर्क नहीं होता। दोनों कांच की बनी है। 1 आईने में। अगर आप देखो, आपको अपनी ही परछाई दिखाई पड़ती है, 1 खिड़की के भीतर आप देखने की कोशिश करो, तो आप खिड़की के पार देख सकते हो। और खिड़की के पार जब देखते हो, आपको सूरज दिखाई पड़ता है, आपको घास दिखाई पड़ती है, आपको चाहे चाहती चिड़िया दिखाई पड़ती है, आपको खेलते बच्चे दिखाई पड़ते है। और दोनो कांच है। दोनों कांच फर्क क्या है। 1 खिड़की में और 1 आईने में। मैं बताता हूँ, खिड़की साफ है। और 1 आईने को अगर आप देखते हो, तो 1 तरफ कालक पोती है। अगर कालक पो दोगे, तो फिर खिड़की आईना बन जाएगी। और फिर आप खिड़की के पार नहीं देख सकते। फिर आपको दुनिया नहीं दिखेगी, फिर आपको सुन्दरता नहीं दिखेगी, फिर आपको खूबसूरती नहीं दिखेगी, फिर क्या दिखेगा? आपको अपना चेहरा और अपना चेहरा जैसा भी हो, अगर भीतर गंदगी है, फिर आईने में गंदगी दिखती है, अगर भीतर कालक है, तो फिर केवल कालक दिखती है, अगर भीतर नकारात्मकता है, तो केवल नकारात्मकता दिखती है। और अगर 1 आईना खिड़की में परिवर्तित हुआ, क्या? बदला कुछ भी नहीं, बहुत साधारण सा बदलाव था, छोटा सा बदलाव था, वो जो कालक पाती थी, वो मिट गई, वो साफ हो गए, किसी ने मेहनत करके उसको साफ कर दिया। और अब अब वो आईना खिड़की बन गया। अब रंग दिखने शुरू हो गए, अब जीवन बदल गया, अब खुशी है, अब मुस्कराहट है, तो ज्यादा बदलाव नहीं होगा, कांच कांच ही रहता है। प्यारे, तुम तुम ही रहोगे, ऐसा नहीं है कि तुम्हारे 10 सर हो जाएंगे, 10 हाथ हो जाएंगे, 10 पैर हो जाएंगे, तुम तुम ही रहोगे, तुम वैसे ही देखोगे जैसे तुम हो। फर्क सिर्फ इतना है कि तुम्हारे भीतर 1 शांति की लहर और तुम्हारे चेहरे पर 1 ख खुशी जिसको मेरे गुरु कहते हैं। शिव योगी का मतलब हर हाल में खुशी क्योंकि हाल हाल जो तुम कहते हो हाल तो उसी का हो सकता है। जो व्यक्ति आईने से घिरा है क्योंकि उसको वही दिखेगा जो उसके भीतर है और जिस व्यक्ति के भीतर सफाई है, शुद्धि है, शांति है तो खिड़की है उसको हर कण अपने भगवान देखेंगे और अगर भगवान देखेंगे तो तो हर हाल में खुशी ही है न। हाँ जी ना जी तो तुम ये मत कहना कि ऐसा क्या बदलना चाहिए, कुछ नहीं बदलना चाहिए तुम तुम ही रहोगे लेकिन अगर तुम अपने भगवान की शक्ति को स्वीकार करते हो तो शण भर लगेगा और तुम्हारा जीवन बदल जाएगा। याद रखना न भर ही लगता है। न जाने कितने लोग शिविर में आते है साधना करते और शिविर में क्यों आए क्योंकि उनके परिवार उनको खींच के ले आया। शिविर में क्यों आए क्योंकि कुछ करने को नहीं था। शिविर में क्यों आया क्योंकि देखा दुनिया जहान चलती हुई आ रही है और नचाने क्यों अपने आप को पाया कि यहां पर बैठे हैं और साधना करने पर मजबूर हैं क्योंकि जब शिविर में आते हैं शिविर में ज्यादा बातचीत तो होती ही नहीं 10 घंटे तक 1 आदमी को साधना कराई जाती है 1 आदमी को ऐसे प्रोटोकॉल्स कराए जाते हैं जिससे उसका जीवन बदले और जब वो साधना करता है तो उसको 1 अनुभूति होती है और फिर वो चौंक जाता है। 1 बार मैं शिविर ले रहा था हांगकांग में और वहाँ पर 1 साधक है जिसको में बहुत प्रेम करता हूँ बहुत अच्छी साधक है। वो इतनी अच्छी साधक है कि उसका जीवन में 1 ही उद्देश्य था कि कुछ न कुछ करके मैं अपने परिवार को भी शिवयोगी बना दूं क्योंकि उसने बहुत सुख अनुभव किया बहुत दिव्यता अनुभव की शिवयोग से तो उसका 1 ही उद्देश्य था कि मेरे पति और मेरे बच्चे भी इस सुख को अनुभव करे और होता है जो बहुत दिव्य लोग हैं जिनके भीतर बहुत ज्यादा ममता होती है वो ये चाहते हैं शेर डिविनिटी दैट आई हैव तो न जाने कैसे 1 दिन शिविर में वो अपने पति को खींच कर ले आए और उसका पति बहुत ही ज्यादा, बुद्धीजी भी बहुत ज्ञान, बहुत सोच सेल्फ मेड मैन, वेरी लॉजिकल, वेरी लॉजिकल और जरूरी भी है उसके लिए लॉजिकल होना क्योंकि कहां से वो शुरू हुआ और कहां पहुंच गया जब शुरू हुआ तो कुछ भी नहीं था और अब अपनी मेहनत से, अपनी सोच से, अपने परिश्रम से, हांगकांग जैसी जगह में उसने अपने लिए 11 घर बनाया, अपने बच्चों को बहुत ही सफलता के शिखर तक पहुंचाया। तो बुद्धी जी भी तो वो था और जब आया उसने देखा कि मैं मैं बैठा हूँ 1 यंग सेंट और उससे बात कर रहा हूँ तो हां उसके तर्क वितर्क को, तर्क, सारे के सारे जो एंटीना थे सब जागरत थे और होता ही है जब मैं बात कर रहा हूँ वो सुन रहा है तो जब कभी भी बातचीत है तब सोच ऊपर नीचे हो सकती है, लेकिन मजे की बात, जब साधना की बात आती है तो तो कुछ ऊपर नीचे नहीं हो सकता। जब साधना की बात आती है त हर कोई अपनी माँ के सामने 1 बालक है, कभी तुमने 1 बालक को देखा है पूर्ण समर्पण 1 बालक कितना भी रो रहा हो, चिल्ला रहा हो, डाइपर में हग दिया, लेकिन जब अपनी माँ को देखेगा पूर्ण समर्पण कर देगा की माँ अब मैं हूँ, जो हूँ, जितना हूँ, जैसा हूँ तुम्हारा हूँ। और जब 1 व्यक्ति साधना करता है तो उसको उसके महादेव के सामने रख देते है। और तब अहंकार किसी बात का ये ही नहीं, तब मैं जो हूँ, जैसा हूँ, जितना हूं, तुम्हारा हूँ। जब साधना शुरू हुई पहली बार इस व्यक्ति ने जो इतना इतना कठोर था इसने अपना अहंकार त्याग, क्योंकि आप खुद सोचो अपने परिवार की खुशी के लिए। hr same he was on hi, alert, he had to be somebody, he had to be a father, he had to be a worker, he had to be a boss, he had to be a husbend, but for the first time in his life, and he was doing the sadhna, he could be नोबडी like a child ही कुड सरेंडर, ऐंड देर इज ग्रेट ग्रेट हीलिंग इन सरेंडर, तुम खुद सोचो, शन भर के लिए, अगर तुम सब छोड़ सको समर्पन कर सको। और वहीं उस व्यक्ति ने किया। जब उसकी आंखें खुली तो उसको लगा 5 मिनट हो गए होंगे, 6 मिनट हो गए होंगे, 7 मिनट हो गए होंगे, क्योंकि कितनी देर आँखें बंद करेगा। 1 आदमी ऐसा व्यक्ति जो इतना कठोर है, इतना बुद्धि जी भी है, 6 मिनट से आता तो आँखें बंद नहीं होती। और फिर उसने अपनी घड़ी को देखा और उसने पाया कि ढाई घंटे की साधना खत्म हो चुकी थी और ढाई घंटे तक वो समाधि में था। दौड़ा दौड़ा वो आया स्टेज के पास, उसने माइक छीना किसी व्यक्ति से और कहा कि तुमने मुझसे ढाई घंटा कैसे साधना करा दी, मुझे तो पता ही नहीं था, मुझे लग रहा था इट विल बी, अ ग्रेजुअल प्रोसेस, पहले 1 घंटा बैठूंगा, फिर डेढ़ बैठूंगा कई सालों तक और फिर कुछ होगा, कभी कभी कुछ होगा। धरती फटेगी आसमान से प्रकाश की लहर मेरे माथे पर पड़ेगी और मैं बोलूंगा कि हाँ अब अब मैं समाधि के लिए तैयार हूं, लेकिन मैं पहली बार आया हूँ, पहली साधना में ढाई घंटा, यह कैसे होगा? स्टेनियस रमिशन, हर कण, हर कण शिवमय हो रहा है, बहुत देर नहीं लगती, शण भर लगता है। शन भर में तुम समाधि को प्राप्त कर सकते हो। शन भर में तुम्हारा आईना, खिड़की में परिवर्तित हो जाएगा। और वो व्यक्ति, वो नौजवान चौंका हुआ, वो न वो। hasbend shot, the how could i set to an? आवर्स इन दि, स्टेट और मजे की बात में उसकी धर्म पत्नी को देख रहा हूँ, उसकी धर्मपत्नी मुस्करा रही है। मैं तो जानती थी यही होगा। और आखिरकार मेरे गुरु ने मेरी सुन ली, ये मैं आपको इसलिए बता रहा हूँ क्योंकि बहुत बार जब हमें लगता है कि समय लगेगा तो हम हताश हो जाते हैं। बहुत बार हमें लगता है कि समय लगेगा तो हम खुद समय लेते हैं अपने जीवन को बदलने के लिए। फिर हम कहते हैं हम धीरे धीरे अपनी गलत आदतों को बदलेंगे। धीरे धीरे हम अपनी सोच को बदलेंगे। धीरे धीरे हम अपने मन को बदलेंगे। आज हम 4 गाली देते हैं कल 3 गाली देंगे। आज हम शराब के 5 पैग पीते हैं, कल 4 पैग पिएंगे। लेकिन मैं आपको बताना चाहता हूँ, यह सोच गलत है। धीरे धीरे से कुछ भी नहीं होता। जीवन बदलने में शंभर लगता है। माना आज अंधकार है और वो अंधकार हजार साल पुराना है। लेकिन अगर उस अंधकार में मैं प्रकाश की 1 किरण जागृत कर दूं तो उस प्रकाश की किरण को कितना समय लगेगा? 5 साल, 6 साल, 10 साल क्यों? क्योंकि अगर हजार साल पुराना अंधकार है तो 10 साल तो लगने चाहिए न? गलत कभी भी 10 साल नहीं लगते। शन भर लगता है। और वही वैज्ञानिक कहते हैं स्पोन्टेनियस मिशन, वही संत कहते हैं हर कण, हर कण शिवमय हो रहा है। तो तुम्हें अपने आप से पूछना है क्या मैं तैयार हूँ? क्या मैं तैयार हूँ अपना जीवन बदलने के लिए, क्या मैं तैयार हूँ अपनी सोच बदलने के लिए, क्या मैं तैयार हूँ अपने परिवार के भीतर 1 खुशी और स्वास्थ्य की लहर लाने के लिए। क्या मैं तैयार हूँ सफल होने के लिए, क्योंकि शंभर लगेगा और अगर तुम तैयार नहीं, बहुत बार बहुत कुछ आएगा और तुम गवा दोगे, असुर का मतलब क्या होता है? असुर का मतलब यही है पाया और गवाया है जी जी, असुर का मतलब यही है कि पाया गंवाया, पाया गवाया, तुमने अपने जीवन में कितनी बार पाया गवाया, प्रेम, पाया गवाया, सफलता पाई गवाई, खुशी पाई गवाई। हो सकता है भगवान भी तुम्हारे जीवन में खुद चल के आई हो। और तुमने पाया गवाया और क्यों पाते हो, क्यों गवाते हो? क्योंकि तुम्हे लगता है कि समय लगेगा। तुम सोचते हो कि तुम तैयार नहीं। और अगर अपने जीवन में 1 बदलाव लेकर के आना है तो तुम्हें अपने आप को याद कराना होगा कि तुम तैयार हो। और शरण भर ही काफी है। अगर भीतर 1 मेंटल ब्लॉक है जो तुम्हें कहता है कि जी समय लगेगा, हो सकता है सौ बार पाऊंगा गवाऊंगा, फिर आखिरी बार मैं मैं पा लूंगा। और ये मेंटल ब्लॉक कहां से आया? क्यों? क्योंकि तुम्हें तुम्हें सिखाया गया कि 1 हीरो जर्नी होती है और हीरो जर्नी का मतलब है। you have to hit rock boton, only, then you can rise up, you have to suffer। only, then you can create, you have to lose only, then you can find it is non sense, who says that a heros jenny has to go down, only then it can go up। what about momentum, what about grace, what about healing, what about blessings। i think, you have read a lot of greek, tregitis, i think, you need a better brand of heroes i think, you need to understand there is a concept in a culture, a concept of bukti, a concept of devotion, a concept of living under the light, and if you live under the light, if you live under the grace, if you live with the stent, if you live with the healing, if you live with the blessings, if you live with the power, you dont need to fold on the ओनली थिंग permanent in nature is changed, and i am becoming betr every single day, i am going every single day, i m becoming more powerful single day। हर कण, हर कण शिव मय हो रहा है। मैं ताकतवर हूं, शक्तिशाली हूँ और महादेव की कृपा प्राप्त कर, शक्ति प्राप्त कर, सिद्धों की तपो अग्नी को प्राप्त कर। मेरा जीवन बदलेगा बदल रहा है। जिस प्रकार से बदलता आया है। और यह सोच आपको स्वीकार करनी होगी। क्योंकि हर सोच इसके सिवाए माया है। और कुछ भी नहीं सिर्फ, यही सच्चाई है। बाकी सब माया है। और माया का मतलब क्या है? फाल्स रियलिटी यू आर be a फॉल्स reality, you are small, this is a falls reality, you are since this is a fol्srealityatemprey reality। वैज्ञानिक कहते हैं शन भर में स्पोंटेनियस रे, मिशन संत कहते हैं, हर छण, हर कण शिवमय हो रहा है, तुम बदलते आये हो, बदल रहे हो। और बदलते रहोगे, तुम्हें बस इतना चुनना है कि किस दिशा में तुम बदलना चाहते हो। और मैं आपको केवल इतना याद कराना चाहता हूँ कि शंभर लगता है। वो व्यक्ति, व बुद्धि जी भी आया, बैठा शन भर में उसका जीवन बदल गया, उसके सच का संहार हो गया। और हाँ, ठीक है। अगर तुम इस चीज से लड़ोगे, इफ यू फाइट, द, ग्रेस, देन, अफकॉर्स यू विल बी, बिकाज यू आर, वेरी स्ट्रोंग पर अगर तुम समर्पण कर सकते हो तो फिर कॉर्मिनेटिव डिसुनेंस की बात ही नहीं है। कॉर्मिनेटिव डिवलेंस का मतलब है कि मैं अपना सच बचाना चाहता हूँ, मैं अपने सच को पकड़ के रखना चाहता हूँ, मैं अपना सच छोड़ना नहीं चाहता। और समर्पण का मतलब है कि ठीक है, अब अहंकार नहीं, अब माया नहीं, जो भी मेरा सच था, मैं अपने भगवान को समर्पित करता हूँ। क्यों? क्योंकि मेरा सच भी तुमसे, मेरा झूठ भी तुमसे मैं। तुमसे तो अहंकार किस बात का मैं चाहता हूँ। आप इस बात को याद रखें। अब कोगनेटिव डिस्ुनेंस से डरना नहीं, बहुत मेहनत की है अपने जीवन में अपने सच का निर्माण करने के लिए। और जिस प्रकार से आप शक्तिशाली हो, उस प्रकार से अपने अपने सच को शक्तिशाली बनाने की कोशिश की। और आप कोशिश करते हो। आप अपने आप को वस्तुओं में डालते हो। 1 नौजवान से अगर मैं उसका सेलफोन खींच लूं, वो रोएगा चीखेगा चिल्लाएगा। वो बोलेगा कि तुमने मुझसे मेरी आत्मा खींच ली, सेलफोन क्या है, कुछ भी नहीं है। लेकिन तुम ने उसको अपनी आत्मा का 1 स्वरूप बना दिया। तुम अपने आप को वस्तुओं में डालने की कोशिश करते हो, सोच में डालने की कोशिश करते हो। और ये क्यों होता है? क्योंकि सिद्धों ने समझाने की कोशिश की या तो तुम खुद को जानोगे, खुद को समझोगे क्यों क्योंकि बच्चा पैदा होता है। सबसे पहला सवाल पूछता है कि मैं कौन हूँ हो आई एंड वाट इज माई पर्पस विक्टर फ्रैंकल ने किताब लिखी? जिस किताब को उसने नाम दिया लोगों स्तरी, लोग स्तरी का मतलब यही है। वट इज माई पर्पस इफ आई एम है। जितने भी लोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर काम करते हैं वो डरते हैं की अगर उनकी मशीन ने यह सवाल पूछ लिया हू एम आई एंड वाई एम आई हैर। फिर तो टर्मिनेटर 2 जजमेंट डे वाला काम हो जाएगा। द होल प्वाइंट ऑफ बीइंग सेंटिएंटइस नोइंग वाई एम आई हैर एंड हू एम आई फर्क सिर्फ इतना है। जब सनातन धर्म का समय था, सिद्धों का समय था। शिव योगी की शक्ति तुम्हारे जीवन में प्रबल थी, तो वो तुम्हें साधना कराते थे। ताकि तुम खोज पाओ कि तुम कौन हो और तुम्हारा उद्देश्य क्या है। और आज की तारीख में तुम्हारे पास समय ही नहीं सिद्धों के पास जाने का, शिवयोगियों के पास जाने का, तो तुम कौन हो। कोई तुम्हें नाम चिपका देता है, कोई न्यूज चैनल, तुम्हे 1 नरेटिव चिपका देता है, कोई कंपनी तुम्हे, 1 लोगो चिपका देती है, तो तुम कौन हो? यू आर, अ, सम टोटल और वाट यू हैव। लर्नड इन योर लाइफ। तुम्हारा उद्देश्य क्या है? तुम्हे नहीं पता जिस किसी से भी बात करते हो, 5 उद्देश्य सुनते हो, उसमें से जो बेस्ट तुम्हे समझ आता है, उसको पकड़ लेते हो। और तुम ये नहीं सोचते कि ये तुम्हारी सच्चाई नहीं है। और फिर जीवन भर लगा देते हो उस सच की रक्षा करने के लिए। और तुम ये भी नहीं सोचते कि सच की रक्षा करने के लिए तुम कौन हो। सच का मतलब ये है कुछ इतना शक्तिशाली, इतना। ताकतवर सूर्य सच है, भगवान सच है, महादेव सच है, तुम्हे लगता है, सूर्य को जरूरत है तुम्हारी रक्षा करने के लिए इतना अहंकार सूर्य तो रोज उदय होगा, सूर्य का रोज अस्त होगा, तुम्हारे बिना होगा, महादेव की शक्ति रोज प्रवाहित होगी। तुम्हारे बिना तुम हो ही कौन। और तुम्हारे भीतर अगर सोच मैं यहाँ पे अपने सच की रक्षा करूँगा। केवल यही मतलब है कि तुमने अभी तक सच को जाना ही नहीं। अभी तक तुम जानते ही नहीं कि तुम कौन हो। और तुम्हारा उद्देश्य क्या है जिस का तुम जान जाओगे, तुम्हारा जीवन छण भर में बदल जाएगा, स्पोन्टेनियस रिमिशन जान। लो हर कण, हर कण शिवमय हो रहा है। जाते जाते तुम्हे मजेदार कहानी सुनाऊंगा, मेरे गुरु ने मुझे सुनाई थी। उन्होंने बताया कि 1 बार 1 राजकुमार था, चक्रवर्ती राजा का राज कुमार और उसने टीवी खोला और टीवी पर न जाने क्या क्या बकवास चालू थी। हर कोई कह रहा था कि ये है, प्लान है, डिम कान है। और राजकुमार को तो सब कुछ उसके राजा से मिल गया। और मधु और कैडर से वशीभूत होकर राजकुमार ने कहा, हे पिता, हे राजा, हे चक्रवर्ती, अब मुझे भी अपना जीवन बनाना है, खोजना है, मैं जा रहा हूँ, मुझे तुम्हारी जरूरत नहीं। i will do whatever i have to do myself on my om ahankar, these are the stupid people, who like to reinvent the veel, who like to reinvent fir? not अंडerstanding that yr and sisters went through hel so that you dont have to। बट ही गो अपने राजा को छोड़ के वो चला गया, अपना जीवन खोजने के लिए, जीवन खोजते, खोजते खोजते आगे बढ़ता गया, राजधानी से दूर, राजपाट से दूर। फिर किसी और किंगडम में चला गया, धीरे धीरे पैसे खत्म हो गए, कपड़े फट गए और देखा कि अब खाना खाना आए तो क्या करें? और देखा कि कोई स्किल सेट नहीं है, जितना भी स्किल सेट है, एडमिस्ट्रेशन में है, इकोनोमिक्स में है और यहाँ पर वो स्किल सेट चलेगा नहीं। और फिर उसने देखा कि मैं शक्तिशाली हूं, सामने लेबर काम कर रही थी, 1 महल का निर्माण कर रही थी, उसने जा के कहा कैन आई हैव अ जॉब और उसको डे लेबर का काम मिल गया। और डी लेबर का काम क्या था, ईटें अंदर लेकर के आना, ईटे बाहर ले कर के जाना, ईटें अंदर लेकर के आना, मलवा बाहर ले कर के जाना, काम पकड़ लिया, ठीक है, कुछ नहीं था, लेकिन काम था, पैसे थे, खाना था, अ सेंस ऑफ परपज था, काम किया, खूब मेहनत की, फिर महल बन गया, फिर लेबर्स के साथ दूसरी जगह पर चला गया, दूसरा महल बनाने, फिर दूसरा महल बन गया, फिर तीसरा महल बनाने। ऐसे करते करते 10 साल बीत गया और धीरे धीरे भूल गया, वो कौन था राजकुमार भूल गया, ना ही was लिविंग डे टू डे मी टू me प्रॉब्लम तो प्रॉब्लम होता है न? तुम्हे पता है वाट इट मींस टू लिव प्रॉब्लम तो प्रॉब्लम यस और नो ऑफकॉर्स यू नो यू नो वाट इट मींस टू लिव प्रॉब्लम तो प्रॉब्लम 1 चीज सॉल्व करो, फिर दूसरी समस्या, फिर 1 चीज साल्व करो दूसरी समस्या और 10 11 साल बाद जो चक्रवर्ती राजा था, वो बुरा हो गया और उसने मंत्री को कहा जा ढूंढ कर लाओ, मेरे बेटे को समय आ चुका है ही मस्ट हैव, लंड हिस लेसन मंत्री गया। खोज ने अपनी पूरी सेना लेकर के गुप्तचर भेजे, हर जगह। और आखिरकार खबर आई कि किसी 1 राज पाठ में 1 महल बन रहा है और उस महल का डे लेवर राजकुमार है। मंत्री पहुंचा वहां पर राजकुमार को देखा, कपड़े फटे थे, चप्पल पटी थी, इतनी ईटें लेकर के अंदर जा रहा था। और मंत्री ने सीधा ही राजकुमार के पास जाकर बोला चलिए पिताजी बुला रहे, शाम भर में राजकुमार की यादाश वापस आ गई, उसको याद आ गया कि मैं क्या कर रहा हूँ। 11 साल बाद अहंकार टूट चुका था, समर्पण आ चुका था, समझ आ चुकी थी। i स् टेक द नॉलेज एंड द पॉवर ऑफ माई सेस्टर टेक दिस इंफॉर्मेशन आई डोंट नीड तो री इन्वेंट the भी ⁇mastkwhtthe divine has गiवnतोमीand s makdबैtरलेकरके इस ज्ञान को। राज कुमार 1 बार फिर रथ पर चढ़ गया, जो रत मंत्री लेकर आया था, मजे की बात कपड़े, फिर भी पड़े थे, चप्पल। फिर भी फटी थी। the skin was still tand, but he said on the chariot and he was a prince, once again ready to be a king। जिस प्रकार से वो राजकुमार था, उसी प्रकार से तुम हो प्यारे। तुम भी पैदा होते हो, महल का निर्माण करते हो, महल बनता है। तो जैसे वो डेली रेबर था, तुम भी डेली लेबर हो। महल जैसे ही बना, तुम्हारा समय आ गया, फिर तुमने शरीर छोड़ दिया, फिर तुम्हारी आत्मा चली गई, फिर पैदा हुए, फिर 1 नए महल का निर्माण किया, फिर मर गए, फिर गए, फिर 1 नए महल का निर्माण किया, फिर मर गए, फिर फिर फिर बार बार, कितनी बार कितनों के महल को तुम बना दोगे। तुमने खुद अनुभव क्या किया है? आज तक दूसरों के लिए, अपना जीवन जी करके आए हो। कभी अपने माँ बाप के लिए जी रहे थे, फिर अपने बच्चों के लिए जी रहे थे, फिर अपनी पत्नी के लिए जी रहे। हमेशा किसी और के लिए। तुम महल का निर्माण करते हो। तुम जानते ही नहीं। तुम कौन हो? और गुरु कौन है? गुरु तो उस मंत्री के समान है। मैं उस मंत्री के समान हूँ। मैं तुम्हारे जीवन में बस इतना आऊँगा और तुमसे बोलूंगा। तुम्हारा पिता, तुम्हारा पिता तुम्हारा इंतज़ार कर रहा है। छोड़ो इस माया को छोड़ो, इस जिद्द को, इस अहंकार को, जिसको तुम लेकर के बैठे हो, जिसको लेकर तुम कह रह। मेरी पहचान मेरी बीमारी है, बिल्कुल भी नहीं, हो ही नहीं सकती। शिव अनंत, शिव कृपा, अनंता हर सा, तुम्हारा हर कर। शिव माय हो रहा है। स्पोन्टेनियस मिशन 10 हैप्पन, कैन हैप्पन? will happen with you god? is great and you are the child, the divinity। तुम उस महादेव से उत्पन हो, जन्मे हो, और 1 दिन उसमें लीन हो जाओगे। इस सोच को। क्यों तुम लेकर बैठे हो, अधूरे हो, तुम बेकार हो, तुम दुखी हो, तुम असहाय हो, तुम हो ही नहीं। आज अगर तुम्हारा गुरु आ करके तुमको कहता है, राजकुमार चलो समय आ चुका है। तुम्हारा पिता तुम्हारा इंतजार कर रहा है, तो तुम उस मंत्री का हाथ थाम लेना। तुम अपने पिता की ओर लौट जाना, क्योंकि तुम्हारा पिता तुम्हारे महादेव हैं। बाकी सब झूठ। अगर इतना, तुम स्वीकार कर लोगे, तो तुम्हारा जीवन अवश्य बदलेगा, अवश्य बदलेगा। मैं नहीं जानता तुमने कितने महल बनाए हैं, मैं नहीं जानता तुम कितनी बार आगे बढ़े हो, कितना तुमने गवाया है, कितना पाया है। मैं केवल इतना जानता हूँ कि तुम्हारे पिता तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं। इस बात को जरूर से जरूर स्वीकार करना। तुम्हारा जीवन अवश्य बदलेगा, अवश्य बदलेगा। और साथ ही साथ कभी यह मत सोचना। यह बहुत समय लगने वाला है। शन भर, शन भर लगेगा, जीवन बदलने में, शन भर लगेगा, अपने भगवान को प्राप्त करने में, शन भर लगेगा, और तुम्हारा आइना खिडकी में परिवर्तित हो जाएगा। आज तुम सोओगे सुबह, तुम उठोगे और तुम कुछ और होगे। आज तुम सोओगे और बीमार, कल, तुम सो उठोगे और तुम स्वस्थ। आज जब सोओगे तो हो सकता है दुखी कल, तुम उ उठोगे, तो तुम खुश। आज जब सोओगे हो सकता है, बुरी आदत है कल जब उठोगे एकदम अलग परिवर्तित चेंज, तुम स्वीकार करना एक्सेप्ट एक्सेप्ट द चेंजेज दैट हैपन। इन योर लाइफ accept the more you accept the more your life will be fulfil। बहुत अच्छे आप सब को, आप सब के भीतर के भगवान को मेरा प्रणाम। मैं आप सब का धन्यवाद करता हूँ जो आज मेरे साथ इस माइंडफुल मैटर्स में थे, और साथ ही साथ मैं धन्यवाद करता हूँ उन लोगों को जो इस वीडियो को लाइक करेंगे और शेयर करेंगे। क्योंकि 1 बहुत से लोग हैं जो आलमोस्ट बदलने को तैयार है, हो आर रेडी for that spontenius रेमिशन तो कम in their life and all the need is a bus। 1 दाना काफी है चावल का तराजू को 1 तरफ करने के लिए क्या पता 1 विडियो काफी है लोगों का जीवन बदलने के लिए, तो तहे दिल से धन्यवाद उन लोगों का जो इस वीडियो को लाइक करेंगे और शेयर करेंगे, साथ ही साथ धन्यवाद उन लोगों का जो हर हफ्ते मेरे साथ आते हैं, बैठते हैं, साधना करते हैं। धन्यवाद उन लोगों का जो शिवयोग की राह पर चल रहे हैं और अपने जीवन को बदल रहे हैं और सनातन को जीवित रख रहे हैं। आप हो तो यह विद्या है, ये ज्ञान है, ये तप है और आपके भगवान हैं। आप उस सांस का काम कर रहे हो जो सांस मेरे भगवान को जीवन प्रदान करती, साथ ही साथ धन्यवाद उन लोगों का जो अगले हफ्ते मुझसे, माइंडफुल, मैटर्स में, फिर मिलेंगे और फिर अपनी साधना को आगे बढ़ाएंगे। आप सबको आप सबके भगवान को मेरा प्रणाम ब्लेस। यू एंड बिफोर यू गो प्लीज शेयर like and spread this noleg bless you now shiva।










