पशु भाव से ऊपर उठें - ईशान शिवानंद

ईशान शिवानंद explains three levels of consciousness using peripheral versus tunnel vision. The animal mindset reacts instinctively without reasoning, like a falcon that cannot see darkness when blindfolded. Moving beyond this requires questioning what is true and false, developing broader awareness that transcends immediate perception.
Chapters
पेरिफ्रल विजन बहुत कीमती माना जाता है। क्यूँ क्यूंकि पेरिफरल विजन के दौरान आप सब कुछ देखते हो। जब आप गाड़ी चला रहे हो तो आप किसी भी 1 जगह पर फोकस नहीं करते। आप सब कुछ 1 साथ देखते हो। रियरव्यू मिरर बगल वाली, सामने वाली पेरिफरल विजन, इस स्ट्रॉंगर दें। टनल विजन। टनल विजन में आपको केवल वो दिख रहा है जो आपके सामने हमारे शास्त्रों में कहा गया है। 3 प्रकार के भाव होते हैं। पशु भाव, मनुष्य भाव देवभाव, पशुभाव में बहुत टनल विजन है। मैं दुबई में था तो वहाँ पे किसने मुझे शेख साहब की 1 चिड़िया दिखाई। 1 बाज बाज बहुत इंटेलीजेंट था, लेकिन बहुत बूंदू। जब बात ऐसे कोई काम नहीं करा रहे होते थे, तो बाँस की सर पर 1 हेलमेट डाल देते थे। 1 ऐसा हेलमेट जो उसके कान और आँख को कवर कर देगा। और जब बाज को लगता था कि अब अंधेरा हो गया, रात हो गयी, सो जाओ। तो बाज बहुत एक्साइटेड है। हेलमेट पहना। 2 जैसे हेलमेट पहना, ओगे सच्ची, तान। यह हेलमेट तो बड़ा अच्छा है। शिव योगियों के लिए। मिलेगा क्या शिविर में आ रहा है। बाज की तरह वहाँ से हेलमेट ना के लोगो को यहाँ बैठा। पशु भाव सोचता ही नहीं की ऐसे कैसे रात हो सकती है। अभी तो रात थी। टेलविजन जो सामने है, वही सच है। पशु बाप को तुम दुख दे। 2 दुखी हो जाएगा, सुख दे। 2 सुखी हो जाएगा, तर्क नहीं है। न जाने कितनी बार मेरे साथ ऐसा हुआ। बंदर को मूंफली खिलाने गया, चाँटे पड़ गये। बंदर को समझ ही नहीं आती कि मैं अच्छा हूँ। बंदर को समझ ही नहीं आती। मैं मूसली खिला रहा हूँ, उसको लगता है, पास आ रहा हूँ, कुछ लेने ही आ रहा होगा। वो चाटे मारते जंगली है न, उसको पता ही नहीं। पशु भाव तनल्विषणफिरजब चेतना उठती है, तो मनुष्य भाव आ जाता है। मनुष्य भाव थोड़ा कीमती है। मनुष्य भाव तुम्हें दर्शाता है कि हाँ, जो दिख रहा है, उसके परे भी जीवन है। मनुष्य भाव जो दिखता है, वो होता नहीं। जो होता है, वो दिखता नहीं। मनुष्य सोचता है, मनुष्य शोध करता है, मनुष्य तर्क वितर्क करता है और उसके हिसाब से अपने जीवन का निर्माण करता है। लेकिन जितना ज्ञानी मनुष्य होगा, उसके भी जीवन की सीमाएं होंगी, उसके भी जीवन की सीमा होगी और अपनी सीमा के अनुसार वो निर्धारित कर देगा। मैं क्या कर सकता हूँ? मैं क्या नहीं कर सकता। क्या सच है, क्या झूठ है, क्या अच्छा है, क्या बुरा है। जो अपने आप को सीमाओं से बांध ले, वो मनुष्य क्यूंकि पूरा जीवन हमने लगा दिया। सीमायें समझने के लिए। तो तुम यह नहीं कह सकते कि मनुष्य का भी पैरिफरल विजन है। वो सब कुछ देख सकता है। जो सामने है, उसको भी वही दिखता है। हाँ, थोड़ा और दूर का देख लेगा। लेकिन पशु और मनुष्य में ज्यादा फर्क नहीं है। अगर तुम 1 मनुष्य को बोलोगे कि कुछ अच्छा हो सकता है। सबसे पहले वो पूछेगा कैसे? और अगर तुम उसको उसके तर्क के अनुसार नहीं समझा सके, तो तुम हार जाओगे। तुम उसका अच्छा कर नहीं सकते।










