ईशान शिवानंद बताते हैं कि बच्चों की anxiety असल में existential crisis है, जिसे वे phone और substances से भगाने की कोशिश करते हैं। इसका समाधान Shiv Yoga और Sanatan Dharma की practices में है, जो "Aham Brahmasmi" जैसे mantras के through inner truth का ज्ञान देती हैं।
Chapters
बच्चों के भीतर 1 एंग्जाइटी उत्पन हो रही है। चिंता और इस चिंता की वजह से कितने सारे बच्चे दुनिया जहान में एस, डी और डी के पीछे जा रहे हैं। सम्स्ूडसॉडरलकोहल और अभी हमें इस डिसॉर्डर को बुरा मानने के बजाय समझना होगा की ये जो बच्चे हैं जिनके भीतर नाइलिस्टिक टेंडेंसीज है एग्जिस्टेंशियल क्राइसिस लैक ऑफ मीनिंग है। अब यह जीवन कैसे जिएंगे तो तुम जब इनके व्यवहार को देखते हो चाहे उस व्यवहार में डिसऑर्डर पे क्यूँ न आओ। यह 1 फॉर्म ऑफ़ सेल्फ मेडिकेशन है। हमारा मन पढ़े चले जा रहा है। अब हम क्या करे उस मन को शांत करने के लिए हम फोन पर बैठ जाते है, उस मन को शांत करने के लिए हम कॉपी लेते हैं उस मन को शांत करने के लिए हम व्यर्थ ी अपने जीवन को बहाते चले जा रहे हैं। अगर हमें इस एग्जिस्टेंशियल क्राइसिस, इस एपसर्टिजमसे ऊपर उठना है तो शिव योग सनातन धर्म कहता है भीतर प्रवेश करना सीखो क्योंकि जब तुम भीतर प्रवेश करोगे तो तुम्हें ज्ञान होगा। अहम ब्रह्मास्मि शिवोहम शिवोहम।