ईशान शिवानंद argues anxiety isn't a disorder but a superpower waiting to be channeled. He claims special children with latent abilities can become geniuses if given proper direction and focus, turning what looks like a problem into an opportunity.
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तुम्हें एंग्जाइटी क्यों है, क्योंकि तुम्हारे भीतर तुमने ही 1 बटन डाला है, जो तुम्हें कहती है, देर समथिंग मोर कितने शिवयोगी मेरे पास आते हैं, कहते हैं कि भैया, हमें घडी की भी जरूरत नहीं पड़ती, जब समय आता है, हमें पता चल जाता है इट इस टाइम फॉर अनुष्ठान और जब अनुष्ठान नहीं होता तो हमें अच्छा नहीं लगता, हमें लगता, कुछ रह गया, कुछ मिस हो गया। और जब कर लेते हैं तो ऐसी शक्ति, ऐसी एनर्जी भीतर से प्रभावित होती है। तो जिस चीज को तुम एंग्जाइटी, इट, इज अ सुपर पॉवर और आज की तारीख में कहते है मेंटल हेल् डिसऑर्डर बढ़ गए हैं, बढ़ गए हैं, ठीक है, अगर तुम्हे समझ नहीं, अगर तुम दिशा नहीं दे सकते, ये मेंटल हेल्थ डिसऑर्डर नहीं, बढ़े हैं। ये ये इंडिगो चिलर, ये जो स्पेशल चिलर है, पॉसिबिलिटी टू बी सुपर ह्यूमन, इन्होंने जन्म लेना शुरू कर दिया। और अगर इन्हें दिशा दे, अगर इन्हें दिशा दे, अगर हम इन्हें समझाए कि ये जो इनको स्पेशल एबिलिटीज मिली, इनको कैसे फोकस करना है, कैसे चैनलाइज करना है, दैन दे, आर द फ्यूचर दे, विल बी जीनियस।