ATTRACT and SUSTAIN Success | Prati Prasav Sadhna @IshanShivanand

A meditation teacher observed employees at a multinational corporation with luxury cars and high salaries but deep stress. She argues that external success doesn't bring lasting fulfillment. True success starts with inner peace, cultivated by sitting quietly with your own thoughts for a few minutes.
Chapters
कभी कबार किसी बहुत बड़ी कंपनी में जा के साधना सिखाता हूँ तो ऐसे दृश्य देखने को मिलते हैं के मैं मैं भी चौंक जाता हूँ। 1 बहुत बड़ी कंपनी में गया था, दुनिया की सबसे बड़ी वहाँ पे जब घुसने लगा तो देखा सबके पास बहुत बड़ी बड़ी गाड़ियाँ हैं, सबके पास सब कुछ था, चलता हुआ अंदर गया तो देखा उनकी मेस में इतना खाना पड़ा है, तुम सोच नहीं सकते, दुनिया के हर देश का खाना पड़ा था वहाँ पर, मुझे लगा यही तो स्वर्ग है क्योंकि जब मैं प्रार्थना करता था किसी के अच्छे के लिए, मैं क्या प्रार्थना करता था, भरपेट खाना मिले अच्छी गाड़ी हो, अच्छा घर हो तो स्वर्ग हो जाएगा। हाँ जी, ना जी और क्या प्रार्थना करते आप अपने बच्चों के लिए अच्छी नौकरी हो, इनके पास तो सब था, और जब साधना सिखाने की बारी आई तो उनका मनेजर आया, स्टेज पर कहने लगा की यह शान शिवानंद है, ये ये है, ये वो है, और ये हम हैं, हम नंबर वन है, टेक्नोलॉजी में नंबर वन है, इन्फ्रास्ट्रक्चर में नंबर वन है हर चीज में और साथ ही साथ हम नंबर वन है। 1 और चीज में, कि हमारे यहाँ के एम्प्लॉई नंबर वन स्ट्रेस्ड हैं। और मेरे अन्दर से बस 1 ही आवाज निकली, क्यूँ तुम क्यूँ स्ट्रेस हो, मेरा स्ट्रेस होना समझ आता है, मैं अभी 1 घंटा पहले निकला था, सड़क पर बैठा हूँ, 1 घंटे से, तुम्हारी तो सड़क पर ट्रैफिक नहीं, तुम क्यूँ स्ट्रेस हो? अगर भीतर शांति नहीं होगी तो मैं उस आदमी को बोलूंगा आँखे बंद करो हम साधना करना चाहते, उससे आँखें बंद ही नहीं होगी। कितनी बार मेरे साथ शिविर में ऐसा होता है। मैं कहता हूँ आँखें बंद करो न भर के लिए आँखें बंद होती है। फिर बगल वाले को देखना शुरू कर देता है, वो क्या कर रहा है? और मैं मन ही मन सोच रहा हूँ, जब आँखें बंद कर रहे हो तो तुम खुद को झेलने की कोशिश कर रहे हो और अगर तुम 5 मिनट खुद को नहीं झेल सकते तो तुम कैसे अपेक्षा रखते हो कि तुम्हारे घर वाले तुम्हें जीवन भर झेल ले। तुम तो 5 मिनट अपने साथ समय व्यतित कर ही नहीं पाया। और फिर अपेक्षा है की बच्चों बीवी वो तुम्हें कैसे झेल पाएंगे? पहले खुद को तो झेलना सीखो, हा जी ना, जी ही वन गॉड। हेल्प दोस, who want to help them sels? अगर शांति होगी तो तुम सोच पाओगे, तुम क्रिएटिव हो पाओगे, तुम स्ट्रैटेजाइज कर सकते हो और तुम सफल भी हो पाओगे। और अगर शांति नहीं होगी त सफलता। अगर आएगी भी तो अपने साथ बहुत चिंता और बहुत दुख लेकर आएगी। अगर शांति नहीं सौ करोड़ है तो सौ करोड़ कारण है चिंता के जैसे जैसे पैसा ऊपर नीचे होगा, तुम और शांत होगे, फिर उस पैसे को बचाना कठिन हो जाएगा। और ऐसा आदमी जो शांत नहीं वो फिर किसी न किसी प्रकार के नशे के पीछे भागेगा, चाहे वो शारीरिक हो, चाहे वो मानसिक हो। और इसलिए भगवान बाद में आते हैं। पहले अपने आप को हमें शांत करना सीखना है, कोई नौजवान मेरे पास आता है, कहता है क्या हम साधना भगवान से जुड़ने के लिए कर रहे हैं? बिल्कुल भी नहीं। भगवान तो है शिव अनंत शिव, कृपा अनंता जो अनंत है उससे तुम कैसे जुडोगे तुम्हें आँखें चाहिए। और साधना हम उन आँखों को विकसित करने के लिए कर रहे हैं। साधना हम अपने आप को शांत करने के लिए सीख रहे। और जहाँ शांति आ जाएगी वहाँ अपने आप तुम्हारे भगवान, तुम्हारे गुरु का आभास होना शुरू हो जायेगा। और जब भगवान और गुरु का आभास होगा तब अपने आप तुम तुम नहीं। तब तुम शिव योगी हो। और शिव योगी का मतलब जो जुड़ गया। कोई आदमी यहाँ बैठ कर कहता है की मेरे रिश्ते ज्यादा अच्छे हो, बाद में पहले शांत होना सीखो क्योंकि प्रेम करने के लिए भी तुम्हें थोड़ी शांति चाहिए, अगर सुबह तैयार हो रहे हो, काम के लिए बहुत स्ट्रेस तो बहुत चिंता में हो, इतने में बच्चा भागा भागा है, पापा मुझे 2 मिनट बाहर घुमाने ले जाओ, तब तुम अगर प्यार भी करना चाहते हो, प्यार निकालेगा नहीं, समझ, नहीं आती, दिख नही रहा, पिताजी के लिए तैयार हो रहे हो, अपनी बीवी पर चिल्लाओगे पकड़ो अपने बच्चे को। फिर वो बच्चा 20 साल बाद मेरे पास प्रति प्रसव में आयेगा, ट्रामा रिलीज के लिए। तुम्हे ये बात सोचनी है, अगर प्रेम करना है, पहले शांत होना सीखना होगा। बोलो मानते हो हाँ जी ना जी, इसलिए तीसरा उद्देश्य शिवर का क्या शांति, पहला था प्रेम, दूसरा खुशी, तीसरा शांति, ये है हमारे उद्देश्य।










