Become more DIVINE and POWERFUL | Ishan Shivanand

Ishan Shivanand contrasts Shiva, the divine state of creativity and healing, with Shav, a state of decay and suffering. He argues that aligning with divine energy through his guru's teachings on integrative cosmic medicine transforms health, success, and mental clarity, while disconnection traps you in pain and procrastination.
Chapters
शव का मतलब जानते हो, मरा हुआ। जो व्यक्ति अपने भीतर के अनंत से जुड़ा है, जो व्यक्ति उस वृक्ष से जुड़ा है, जो ब्रह्मांड की दिव्यता को दर्शाती है, जो व्यक्ति अपने भगवान से जुड़ा है, जो व्यक्ति प्रकृति की दिव्यता से जुड़ा है, वो व्यक्ति शिव योगी और जो जुड़ा है, वो सफल भी है। क्यूँकि मैं दुनिया जहान में घूमता हूँ, दुनिया जहान के सफल व्यक्तियों से मिलता हूँ, दुनिया जहान की नंबर वन कंपनियों में साधना सिखाता हूँ। और मैंने ये देखा, जो सफल है, वो शिवयोगी है। जो उस दिव्यता से जुड़ा है, उसके भीतर विचार आता है। क्रिएटिविटी आती है, फर्क क्या है? अगर शिव योगी हो, तो क्रिटिविटी आएगी उस क्रिएटिविटी पर तुम कर्म करोगे और वो कर्म, फलीभूत होगा। और अगर उस दिव्यता से जुडे नहीं, तो जीवन में इतनी चिंता होगी, इतना दुख होगा की क्रिएटिविटी आएगी। लेकिन समय नहीं। किसके पास समय है अपनी क्रिएटिविटी पर कर्म करने का, जब छोटे छोटे इधर उधर के दुःख, कष्ट और पीड़ा में बिखर गए। ै जो अनंत से जुड़ा है, वो शिवयोगी, वो हमेशा बेहतर होगा, वो दिव्यता की ओर प्रवाहित होगा। और जो जाने अनजाने में, उस अनंत से कट गया, ऐसे कर्म कर डाले कि फल व्रक्ष से गिर गया, वो फल उसी समय सवयोगी हो जाता है। और शव योगी का मतलब कि आज स्वस्थ है, इंतज़ार करो कल बीमार जरूर पड़ेगा, आज दुखी है, इंतज़ार करो, कल, उसका दुख भीषण हो जायेगा। आज क्रोधित है, इंतज़ार करो, कल हताश हो जाएगा, देखा होगा आपने? हाँ जी नाजी क्यूंकी। 1 शव की बुझाओं पर अगर चोट मार 2 वो चोट ठीक नहीं होती, बल्कि और सड़ जाती है, कीड़े पड़ जाते हैं। अगर जीवित है, बुझा पर चोट आ गई, क्या फर्क पड़ता है, हफ्ता 2, हफ्ता 2 ठीक हो जाओगे। हाँ जी, ना जी, और अगर चोट आई, ठीक ही नहीं हो पा रहे, दुख आया, ठीक ही नहीं हो पा रहे, दुख आया। फिर वो दुख मानसिक बीमारी बन के रह गया। मतलब केवल इतना शवयोगीहैकाट गया। उस अनंत से दिव्य शक्ति भीतर प्रवाहित नहीं, जो तुम्हें स्वस्थ कर सके। और जो शव है, वो सड़ेगा, जो शिव है, वो बढेगा। और तुम्हे अपने आप से सवाल। केवल इतना करना है कि मैं शिव हूँ, या शव। मुझे सड़ना है या बढ़ना है। और मेरे गुरु ने समझाया बेटा आज की तारीख का विज्ञान जुड़ना तो जानता नहीं, प्रोकास्टिनेट करना जानता है, बीमारी ठीक करना तो जानता नहीं, वेंटिलेटर पर डालना जानता है कि यह सेब तो सड़ने वाला है। तो कितनी देर तक मैं खींच दूं। ki nazar और ili shiviyoge is the since beyond sins, isle shiviyoge is the foundation of integrative cosmic medicine के सबसे पहले जुड़ना सीखो। और जिस दिन तुम जुड जाओगे, तुम्हारा जीवन बदल जाएगा। अगर शिवयोगी हो तो तुम जहाँ जाओगे, फिर सड़े सेव भी तुम जोड़ सकते हो उस अनंत से। और ऐसा होता ही है न। मेरे गुरु जहाँ जाते हैं, वो ऐसे सेव हैं, जो बाकी सेव को भी विकसित कर देते हैं। क्यूँकि तुम शिव हो तुम पढ़ रहे हो, जो सब है, वो सड़ रहा है। और इसलिए इस प्रति साधना में मेरा उद्देश्य यह नहीं है कि मैं तुम्हे रेफ्रिजरेटर में डाल दूं, मैं प्रोकास्टिनेट कर दूं। और हे शिव। शिवा अगर मेरे पास आये हो, ऐसी प्रार्थना लेकर मत आना की भैया हमारा सेब सड़ रहा है। थोड़ा कम तेजी से से तुम्हारी प्रार्थना 1 ही होनी चाहिए कि हे भैया। अगर मैं आया हूँ, मेरा सेव 1 बार फिर कुस वृक्ष से जुड़ जाए, जिस वृक्ष से मैं जन्मा हूँ, और अगर जुड जाओगे बढ़ जाओगे, अगर जुड जाओगे, तुम्हारे भीतर दिव्य एवं ताकतवर बदलाव होने शुरू हो जाएंगे। इस बात को समझना मैं तुम्हें कुछ देने यहाँ पर नहीं बैठा, जो तुम्हारे भीतर है, उसको जागरत करने के लिए बैठा। ooud।










