Ishan Shivanand argues that greed and hatred come from within us, not from what we see around us. Through spiritual practice and a guru's guidance, anyone can transform these tendencies into something positive and real.
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जो कुछ भी तुम चाहो, तुम उत्पन कर सकते हो, तुम जाग्रत कर सकते हो। हर मनुष्य साधना, परिश्रम और गुरु की कृपा से बहुत कुछ प्राप्त कर सकता है। और ये मैं सिर्फ कह नहीं रहा, यह मैं देखता हूँ, लेकिन तुम्हारे हाथ में है। अपने गुरु की सहायता कर। तुम याद रखो, कोई चीज तुम्हें प्रलोभित कर रही है या किसी चीज को देख तुम्हें घृणा आ रही है तो कभी भी वो चीज की वजह से नहीं आ रही। वो तुम्हारे गुणों की वजह से आ रही। प्रलोभन भी गुणों से है, घना भी गुणों से ह, इसके भीतर प्रवेश करना आपको भाव आपको जो आप में आपके राम आप होकर रहते हैं और जब साधना करोगे, जब केतना उठेगी देखो की कोई आपके पास आयेगा नकारात्मक को कटोरी में लेकर आप करोगे सच्ची फिर तो हर हाल में।