Ishan Shivanand argues that a guru is essential to lift you out of darkness and build your own belief system. Without one, you drift like a boat without an oar. Hope fuels effort and a better tomorrow; without it, you fall into despair and stop trying.
Chapters
जिस व्यक्ति ने मुझे इस अंधकार से ऊपर उठाया, वो मेरा गुरु और न मैं भी फंसा रहता। पुनरपि जननम पुनरपि मरना मेरी चेतना भी अटकी रहती है। जिस संत ने मुझे ज्ञान दिया और ये ज्ञान भी जरूरी है क्योंकि जिस नौजवान के पास गुरु का बिलीव सिस्टम नहीं है, स नाव की तरह है जो बिना चप्पू के समुद्र में चल रहे। इफ यू डोंट स्टैंड फॉर समथिंग यू विल फॉल फॉर एनी थिंग। अगर तुम्हारे भीतर कोई कोई विश्वास नहीं है, तो तुम्हे कोई भी कुछ भी दे देगा, तुम उसके पीछे चल पड़ोगे। खुद का बिलीफ सिस्टम होना बहुत जरूरी है, खुद का विश्वास होना बहुत जरूरी है। और गुरु कौन तुम्हे यह बिलीव सिस्टम देता है। क्यूंकी यही बिलीव सिस्टम तुम्हे ताकत देगा, यही ताकत तुम्हें होप देगी। 1 आशा की है। कल को कुछ और अच्छा हो सकता है, और अगर आशा होगी कल को कुछ और अच्छा हो सकता है, तो तुम मेहनत करोगे, और अगर आशा नहीं तो तुम हताश हो के बैठ जाओगे। और जिसने मेहनत ही नहीं की, जिसमें जिगरा नहीं उसको कभी सफलता प्राप्त होगी गेरे।