True devotion to a guru means studying and internalizing their qualities, not performing rituals or offerings. The speaker uses Baba ji's 20-hour work days and strict focus as an example of the commitment a real disciple should embody. Genuine guru dakshina is transforming yourself into the qualities your guru represents.
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क्यूँ हमारे सब दृश्यों ने हमें इष्ट दिए ताकि तुम अपने इष्ट को अपना रोल मॉडल बना लो, अपने इष्ट को अपना रोल मॉडल बना लो ताकि उसकी सारी खुबिया तुम्हारे भीतर आ जाए। अब तुम कहते हो की मैं भगवान शिव की पूजा करता हूँ, भगवान शिव तो माँ पार्वती से बहुत प्रेम करते है और तुम भगवान शिव की पूजा करके अपनी पत्नी को हो तो तुमने अपने इष्ट की पूजा की नहीं जिसकी सारी क्वालिटी तुम अपने भीतर लोग कहते है मैं शिव योगी हूँ, मैं बाबा जी को मानता हूँ। अगर बाबा जी को मानते हो तो तुम्हारा वर्ग थिक तो बहुत ताकतवर होना चाहिए, बहुत बढ़िया होना चाहिए। क्योंकी बाबा जी तो विश्वास रखते हैं टू हंड्रेड परसेंट सक्सेस, टू हंड्रेड परसेंट लाइफ में बाबा जी का दिन 20 घंटे का होता है। बाबा जी का वर्क एथिक इतना ज्यादा है तुम देख लो जो लोग बाबा जी के साथ काम करते हैं बड़ी परेशानी है, खुद तो सोते नहीं, 6 घंटा ध्यान करके उनका हो जाता है। रात के 2 बजे बाबा जी का 1 ईमेल आएगा और फिर 6 बजे तक वो गुस्सा हो जाएगा की 2 बजे का ईमेल रिप्लाई को ही हुआ बाबा जी के साथ काम करना, तलवार की धार पर चलने जैसा इतना ताकतवर और जो बाबा जी को फिर देख हम भी बाबा जी की तरह बन जायेंगे कुछ नहीं करेंगे, ऐसा नहीं होता। अगर अपने गुरु से प्रेम करते तो बहुत ध्यान से अपने गुरु को देखो, बहुत ध्यान से अपने गुरु की सारी क्वालिटीज को देखो और उन क्वालिटीज को अपने अन्दर लेकर आओ। तब तो तुमने अपने इष्ट की पूजा की, अपने इष्ट पर दूध डालना, भलाई डालना। ये इस्ट की पूजा नहीं होती, इसकी क्वालिटी को अपने कणकण में डालना, ये इस्ट की पूजा होती है। अपने गुरु को देख, प्रणाम करना गुरु पूजा नहीं है, लेकिन अपने गुरु के ज्ञान को, अपने गुरु की 11 क्वालिटी को जीवन में लाना, यह सही मायने में गुरु दक्षिणा है।