After three years interviewing people at a Lucknow ashram, the speaker found that those with strong parental relationships have a clear inner voice guiding their choices, while those from broken families struggle with decisions and mental health. Respecting and engaging with family, he says, strengthens this inner guidance and prevents psychological problems.
Chapters
मैं शुरुआत में लखनऊ आश्रम में लोगों को प्रति प्रसव कराता था तो 3 साल तक मैंने लोगो को से मुझे बहुत डेटा मिला मेरा रिसर्च बहुत ताकतवर हुआ क्योंकि मैंने इतने लोगो से बात की मैंने समझा कि जो लोग अपने जीवन में बहुत सफल है मजे की बात उनके भीतर कहीं न कहीं 1 आवाज है इनर वॉइस और वो इनर वॉइस उनके माता पिता की और मैंने देखा जिनकी जिनकी रिलेशन उनके माता पिता से बहुत अच्छी थी कहीं न कहीं वो ज्ञान जो उन्हें उनके माता पिता से मिला 1 अच्छी फैमिली से मिला वो ज्ञान उन्हें सदा हुआ रखता है अच्छे डिसिजंस उनसे दिलवाता है और जिन लोगों की 1 बहुत ब्रोकन फैमिली थी जिन लोगो की खुद की माता से ही नहीं बनी, खुद के पिता ऐसे ही नहीं बनी। जो लोग अपने ही माता पिता को ठुकरा कर के बैठे हैं उनके भीतर इनर वॉइस नहीं, ये जो अंदर से आवाज आती है, जो कहती है, ये गलत है, ये ना करो या ये ऐसी चीज है, यह नाक वो आवाज़ ही नहीं है तो मेरे लिए बहुत कठिन हो जाता था इस आवाज को जागृत करना, फिर यही आवाज, फिर उनको खूब साधना कराओ ताकि यही आवाज फिर गुरु की आवाज बने वो लोग काम मेरा मुश्किल करते थे और मैं आपसे कहता हूँ की अगर हम बस 1 छोटा सा प्राइज पे कर दे, अटेंशन ध्यान देना, बस थोड़ा थोड़ा सा अपने परिवार पर ध्यान देना तो कितनी सारी ऐसी साइकोलॉजिकल प्रॉब्लम है जिससे हम अपनी आने वाली पीडी को बचा सकते हैं। सरप्राइज वर्थ पे तेरे।