Ishan Shivanand argues that over fifteen years working in schools and government agencies, he's observed a sharp rise in psychopathic traits among children. Where people once helped someone who fell, they now photograph it. Compassion has given way to criticism and indifference.
Chapters
मनुष्य बीच का है। कर्मों के अनुसार देव भी बन सकता है, असुर भी बन सकता है। जब हर मनुष्य देवता सतयुग था, जिस दिन मनुष्य असुर बन जाएगा, घोर और यह में कोई फिलोसोफी का तुम्हें बेकार लेक्चर नहीं दे रहा। यह स्टैटिस्टिकल एनालिसिस है, न्यू यारिस साइकोसिस आज की तारीख में बढ़ रहा है। मैं पिछले पंद्रह सालों से स्कूलों में जा जा कर काम कर रहा हूँ। विभिन्न गवर्नमेंट, एजेंसीज के साथ, विभिन्न गवर्नमेंट के साथ काम कर रहा हूँ। और आज की तारीख में देखा जा रहा है कि पंद्रह साल पहले इतने साइकोपैथ बच्चे पैदा नहीं होते थे, जितना आज की तारीख में साइकोपैथ बच्चे पैदा हो रहे हैं। साइकोपैथ का मतलब एमपी है ही नहीं। साइकोपैथ का मतलब पहले कोई आदमी गिरता था, लोग सहायता करते थे, अब कोई गिरता लोग फोटो निकालते देखा है। तुमने हाँ जी नाजी। साइकोपैथ का मतलब पहले कोई समस्या आती थी, लोग मदद करते थे, अब क्या है, समस्या आती है, लोग प्रोफेट करते है।