Ishan Shivanand speaks in Hindi about his pride in his guru and ShivYog practice. He shares how an aunt recovered from severe illness, reunited her family, and found her children listening to her again after practicing. He says such transformations matter more than any material success.
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हर स्थान जहाँ बाबा जी जाते हैं, लोग स्वीकार करते हैं उनके ललिता को और बहुत खुशी होती है। अब कोई कहता है गर्व क्यों है? तो मैं कहता हूँ हर रोज मेरा गुरु कोई न कोई कारण देता है और वो सब तो कुछ भी नहीं, वो सब तो कागज है मेरे लिए। मुझे अपने गुरु पर गर्व क्यों है क जब 1 आंटी खड़ी होती है और कहती है कि मैं बहुत बीमार थी, मेरे बच्चे मेरी बात नहीं मानते थे और शिवयोग के बाद मेरे बच्चे अच्छे हो गए, मेरा शरीर स्वस्थ हो गया, मेरा परिवार 1 हो गया। दुनिया के कोई भी रटगर्स मुझे इतना गर्म नहीं कर सकती जितना वो आंटी मेरे को मेरे गुरु पर गर्व कराती है। मुझे अपने गुरु पर गर्व है आप सब लोगों की वजह से क्योंकि आप सब लोगों के जीवन में इतने चमत्कार, इतनी दिव्यता उत्पन होती है और मजे की बात अगर आपको भी ये गर्भ होगा तो आपको शक्ति मिलेगी प्रेरणा। मिलेगी किस बात की की आप अपने जीवन में बदलाव लेकर के आस।