Ishan Shivanand challenges you to choose between chasing social expectations and fear of judgment, or building inner strength and self-confidence. He frames life as a series of bets on external validation—school, college, job, marriage, children—that often leave you empty. Real success comes when you drop ego, embrace confidence, and unlock creativity and joy from within.
Chapters
अब देखो आपके पास 2 रास्ते हैं या तो अभी भी एफ पी में फसे रहो एफ पी का मतलब लोग क्या कहेंगे की मैं गाँव न गाऊ बगल वाली आंटी मुझे जज कर देगी, मैं ताली बजाऊं न बजाऊँ लोग क्या कहेंगे मैं हिल ना हिल लेकिन अगर एफ पी में फंसे रहे फिर पशुभाव में मैं देव भाव की बात कर रहा हूँ, मैं 1 क्रिएटिविटी 1 खुशी की बात कर रहा हूँ, 1 लहर की बात कर रहा हूँ और वो लहर तब आएगी जब आत्मविश्वास होगा जिसके भीतर आत्मविश्वास है उसी के भीतर भक्ति हो सकती है। तुम देखो जीवन भर दाव लगाते हो, पहले स्कूल पर दाव लगाया, कहने वाले ने कहा अगर ढंग से पढाई करोगे, अच्छी नौकरी मिल जाएगी, कोई गारंटी नहीं है, दाव भी तो है, ये बैठे हैं या नहीं। हाँ जी, ना जी। फिर किसी ने कहा कॉलेज पर बेट लगाओ, फिर शायद अच्छी जॉब मिल जाएगी, तुमने कॉलेज पर भी बेठ लगा दी, 5 साल लगा दिए, खूब मेहनत लगा दी और न जाने क्या मिला। फिर किसी ने कहा खुशी चाहिए, शादी कर लो, बेट लगा, तुमने वो भी कर लिए और फिर तो तुम्हें पता है क्या हुआ तुम्हारे साथ। फिर किसी ने कहा बच्चे पैदा कर। 2 तुमने उस पर भी बैट लगा दी, तुम हर बार बेट लगाते हो, हर चीज पर दाव खेलते हो, कयके तुम्हे क्या पता क्या हो जाएगा। और आज मैं कह रहा हूँ। 11 ऐसी बैठ जिसमे पहली बार तुम्हे कैपिटल एशोरेंस 1 ऐसी बेट जिसमे अपने आप तुम्हारा इंट्रेस्ट भी शोर है, तो इस बैठ में जब तुम्हे बढ़ना ही है, इस दवा में जब तुम्हें और बेहतर होना है तो फिर अहंकार छोड़ देना। अब एफ पी में जीवन को मत निकालो, अब थोड़ा आत्मविश्वास ला।