Ishan Shivanand uses the image of an elephant chained from childhood to explain how conditioning limits human potential. Even when the chain weakens, the elephant no longer tries to break free, accepting restraint as normal. A guru's role is to help you recognize and dissolve these self-imposed limits and access your infinite power.
Chapters
मैं अपने आप को बहुत नसीब वाला, मानता बहुत भाग्यशाली मानता मुझे 1 जीवित गुरु मिले अब धुत शिवा क्यूँ की हर शिव योगी को में देखता हूँ जो बाबा जी के पास आता है। जैसा बेकर ने कहा। जैसा बोनो ने कहा सब कुछ भूला हुआ आता है, कुछ याद ही नहीं उसको जो आदत पड़ गई उसी आदत का मरीज तुम कभी साउथ इंडिया में जाना। तुम हाथी देखोगे हजार। किलो के हाथी पर 50 किलो का आदमी महावत बना बैठा है और तुम सोचोगे कैसे बहुत आसान है। जब हाथी बच्चा होता है तब उसको बांध देते हैं पेड़ से बड़ी चेन जंजीर के साथ, हाथी बहुत कोशिश करता है, जंजीर टूटती नहीं, धीरे धीरे बड़ा होता है, क्या टूटता है उसका नीचे। अब वो कहता है दूध का जला छाछ भी फूक के पीता है। अब वो कहता है की कितनी कोशिश की थी मैंने जंजीर तोड़ने की, बचपन बीत गया, जंजीर टूटी नहीं, धीरे धीरे बड़ा होना शुरू करता है, महावत चैन पतली कर देता है, वक्ष पतला कर देता है। और जब भी वो कोशिश ही नहीं करता क्यूँ हैबिट बन गई बंदे रहने की। तुम दुनिया जीत सकते हो लेकिन अगर नेगेटिव विलीज सिस्टम है तो नहीं जीत सकते। तो नेगेटिव विलीज सिस्टम तुम्हे कुपित कर देगा, नेगेटिव विलीज सिस्टम दुनिया छुट्टी कर देगा। और अब नेगेटिव बिलीफ सिस्टम हाथी का है की मैं मुक्त हो ही नहीं सकता। तो अब महावत उसको प्लास्टिक की डोरी से बांधता है, पतली डंडी से बांधता है, महावत जब बांधता है तो हाथी कोशिश नहीं करता, बोलो जानते हो हाजी और ऐसे कितने हाथी है जो मेरे गुरु के पास आते, मेरा गुरु कहता अरे बहुत ताकत है तुम्हारे अन्दर cronttहर।