Ishan Shivanand argues that inventors and saints like Mirabai succeeded because their positive nature rejected negativity at its source. Ideas start as thoughts, not objects, so any doubt kills them before they exist. A truly positive mind automatically filters out what doesn't belong.
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sakaratmकprkuतi ऐसे व्यक्ति से आप कुछ भी सकारात्मक बोलो वो सीधा सीधा स्वीकार कर लेगा की बात, शिव, अनंत, शिव, कृपा, अनंत वो खोज लेगा आप, कभी खुद सोचो, जितने भी आविष्कार, जितने भी वैज्ञानिक हुए उनको कितना सकारात्मक होना पड़ा होगा, क्योंकि जब भी उन्होंने किसी भी वस्तु का निर्माण किया वो वस्तु प्रकृति में थी नहीं, वो 1 विचार था और उनकी खुद की प्रकृति इतनी सकारात्मक थी कि कितने आये उनको बोलने नहीं हो सकता, यह हो ही नहीं सकता, तुम तो गलत चीज के पीछे भाग रहे हो, उन्होंने अपना विचार नहीं छोड़ा क्योंकि उनकी प्रकृति में किसी और की नेगेटिविटी सर्वाइव कर ही नहीं सकते, जितने भी संत हैं, कितने सकारात्मक रहे होंगे। कितनों ने मीरा बाई को आके कहा की तेरे कृष्ण है ही नहीं, छोड़ दे, ये छोड़ दे, ये हम सब की तरह पूजा कर, अपना ये जनून छोड़ दे। लेकिन मीरा बाई ने हाथ जोड़ दिए होंगे क्यों? क्योंकि उसकी सकारात्मक प्रकृति में किसी और के नकारात्मक विचार जीवित हो ही नहीं सकते।