Ishan Shivanand, a university meditation instructor, warns that young people confuse real peace with numbness. True shanti is active and uplifting; the numb state people chase through overeating, shopping, scrolling, and drugs leaves headaches and stomach pain. Only meditation delivers lasting peace, he says.
Chapters
जब मैं यूनिवर्सिटी में साधना सिखाता हूँ, सबसे पहली चीज मैंने क्या देखी आज के नौजवान मूर्छित होने में और शांत होने में फर्क भूल चुके शांत होने का मतलब है कि मैं शांत होना चाहता हूँ। मैंने सास चढ़ाई साधना की शांत हुआ, सो गया भीतर से मुर्चित होने का मतलब की मुझे शांत होना नहीं आता तो डिपेंडेंट ऑन क्टरनलस्टमuलs for my क्रिएट अब मुझे शांत होना है मुझे पता ही नहीं शांत कैसे हो रहा है तो मैं देखता हूँ जेम्स बॉंड है लड़ाई करके आ रहा है, कैसे शांत हो रहा है मार्टिन स्टर्ड तो मैं भी पहुँच जाता हूँ और उसे शांति के चक्कर में मुर्छित हो गया। पता नहीं शांत कैसे होना है तो मैं खाना शुरू करता हूँ, मैं तब तक खाता जाता हूँ जब तक बेहोश नहीं हो जाता। इतने सारे लोग मैंने देखा फूड कोमा में चले आते, मैं शौपिंग करता हूँ तब तक जब तक मुर्छित नहीं हो जाता। या फिर 11 बजे मुझे ऑलमोस्ट नींद आ गई नाइंटी परसेंट तो मुझे 1 बार देख लो, फेसबुक बस ऑलमोस्ट नींद आ गयी और ये करते करते करते करते रात के साढ़े 3 बज गए और अब फेसबुक वाला भी कह रहा है भाई अब मेरे पास और कुछ नहीं है, दिखाने को चिंता मत करो ग्राम दे है न अभी और तुम्हे कैसे पता शांति और मूर्छित होने में फर्क क्या है? शांति हमेशा तुम्हे बढ़ाती है, मुर्छित होना हमेशा तुम्हे घटाता है। हर बेवड़ा नशे के समय खुश तो जरूर हो जायेगा, लेकिन नशे के बाद जब उठेगा तो सर में दर्द होगी, शरीर थोड़ा और बिखर चुका होगा, खाने के बाद जब उठेगा, पेट में दर्द होगी, शरीर थोड़ा और बिखर चुका हो, हर आदमी मूर्छन के बाद जब उठता है थोड़ा कम थोड़ा, कम शांति के बाद जब उठता है थोड़ा ज्यादा, थोड़ा ज्यादा और जो शांति साधना दे सकती है, इस दुनिया का कोई और सुख नहीं दे सकता।