Ishan Shivanand critiques the obsession with branded possessions—clothes, shoes, watches, cars—as sources of pride, noting they fade, tear, and break. He argues that eternal knowledge is the only pride worth holding, something no one can steal or damage, and it stays with you beyond this life.
Chapters
हम इकलौती पीडी है इकलौती प्रजाति जिसका सनातन अमूल्य है और हम उसको कीमत लगादेंगे तुम्हे अपने ब्रैंड खुद बनानी होगी और अगर तुम्हे अपने पर विश्वास हो गया अगर तुम्हे अपनी ब्रैंड पर विश्वास हो गया तो दुनिया जहान लाइन लगाएगी तुम्हारे सामने मजे की बात लग रही है लेकिन तुम्हें पता ही नहीं कहाँ लगा रहे है क्यूँ लगा रहे इसलिए अगर ऊपर से लेकर नीचे तक बिल बोर्ड बने बैठे बने हुए हो की मार्केटिंग कर रहे हैं। तुम्हारी कमीज भी किसी की मार्केटिंग है, जित्ता भी किसी का मार्केटिंग है बोलो है या नहीं है बिल बोडी तो हो तो रिददिकरोशनकोतो फिर भी लाख 2 लाख मिलता होगा कमीज पने का तुम तो मुफ्त में ब्रैंडिंग करते हो और अगर तुम कमीज को वित प्राइड पहन के घूम सकते हो की अरे ये मेरी कमीज है इतनी महंगी है और उस कमीज के ऊपर प्राइड जो भट जानी है 10 दिन में और क्यूँ भरजानी तों का साइज देखो 1 न 1 दिन बैठोगे बटन फूट के सामने वाले की आँख पड़ेगा तुम्हे अपनी पतलून की प्राइड है ब्रैंड दिखाते और वो भी पतलून जो 10 दिन में फिट नहीं होगी अपनी घड़ी की प्राइड है जो चोरी हो जाएगी, जूते की प्राइड है, जो गन्दा हो जाएगा, गाड़ी की प्राइड है जो ठुक जाती है। हे शिव योगी, शिव योग, सनातन की भी प्राइड कर डालो उसको भी गर्व से ले कर के चलो क्यूँ की यही तुम्हारा ज्ञान है जिसको कोई ले नहीं सकता, कोई टोक नहीं सकता, कोई छीन नहीं सकता और यही 1 ज्ञान है जो जिंदगी के साथ भी जिंदगी के बाद भी टैगलाइन मेरी नहीं है लेकिन हम पर ज्यादा लागू होती है।