Ishan Shivanand compares personal growth to a river that never returns to the same spot. Like software versions, you must discard old habits and beliefs to evolve. Clinging to the past blocks the change that is nature itself.
Chapters
देखो प्रकृति में इकलौती स्थाई वस्तु है। बदलाव हाँ जी ना जी, तुम बदल रहे हो, बदलते आये हो बदलते रहोगे हर 1 लिटिस स्नेहा यू कैन नोट बेद इन द सेम रिवर ट्वाइस तुम 1 ही नदी में 2 बार नहीं आ सकते, क्योंकि 1 बार नहा के जब बाहर निकालोगे, वो नदी बह जाएगी, फिर उसके स्थान पर अब दूसरी नदी है, फिर डुबकी मारोगे फिर वो भी बह जाएगी। कहने का मतलब ये कि तुम बदल रहे हो, तुम्हारा विकास हो रहा है और अगर विकास हो रहा है तो पुराने को त्यागना सीखो कोई तुम्हारे पास आये। और बोले की अरे वो फलानी बात तुम्हारे जीवन में हुई थी, तुम बोलना हाँ हुई थी, तब मैं वर्जन वन था, शिविर के बाद में वजन तो प्वाइंट हूँ एडवांस हो गया। तो अब इस नए वर्जन पर पुरानी बात लागू नहीं, फिर कोई आया। अरे वर्जन 2 के साथ बात हुई थी। तुम लो वर्जन वर्जन में अपने फ़ोन से ज्यादा जल्दी विकसित हो रहा है और होना चाहिए ही। लेकिन विकास तब होगा जब 1 पुराना छोर। कोई लॉजिक नहीं, उस बात में कोई तर्क नहीं, उस बात में विष्टा है, खत्म हुआ।