Ishan Shivanand uses the horse-and-rider metaphor to argue that technology is the horse and humans are the rider. We upgrade technology constantly but neglect human wisdom and mindfulness. If human development doesn't keep pace with tech, we lose control of our own future.
Chapters
पुराने जमाने में जब योद्धा होते थे तो हर योद्धा का 1 घोड़ा होता था। किसी भी महान योद्धा के बारे में तुम पढ़ो सिकंदर का बुसेफ्लस, हमारे महाराजा का चेतक, दुनिया, जहान के घोडे और जो गुड़ सवाल होता था उसको घोड़े से तेज होना पड़ता था। क्या घोड़े से क्या, अगर घोड़े से तेज नहीं होगा तो घोड़ा उसको उठा के निचे फेक के तांडब करके दौड़ेगा। तो इसलिए गुड़ सवार हमेशा घोड़े से थोड़ा तेज रहता था। थोड़ा और विकसित, थोड़ा और ज्ञानी, थोड़ा और समझदार ताकि घोडे को दिशा दे सके। हमारा घोडा है, टेक्नोलॉजी और गुड सवार है। मनुष्य समस्या क्या हो रही है की हम घोड़े को और आधुनिक करते जा रहे हैं और गुड सवार पर कोई काम नहीं कर रहे हैं। अगर हमारा विकास टेक्नोलॉजी के साथ साथ चलता है तो हम इस टेक्नोलॉजी को राइट कर फ्यूचर की ओर बढ़ सकते हैं। लेकिन अगर हमारा विकास इस टेक्नोलॉजी से धीरे हुआ, इन फैक्ट हुआ ही नहीं और टेक्नोलॉजी का विकास होता चला गया तो ये टेक्नोलॉजी हमें राइट करना शुरू कर देगी।