Ishan Shivanand argues that fasting to please God is absurd, like pouring water into the ocean expecting a tsunami. His guru describes God as loving and chill, not someone whose emotions you can influence. Fasting works better as personal detox and spiritual practice than as a transaction.
Chapters
1 तो हमारे मंदिर में इतना पॉपुलेशन जितना भारत में नही है देगा तो उसको लगेगा की गणेश जी के 2 बार घुमा कर, अगर नहीं घुमाई तो वो अपना मोड़ ले के जायेंगे और अगर कार्तिक जी के 3 बार घुमाए, गणेश जी के 1 बार घुमा तो वो रेडी सीधी हम यहाँ से जा रहे है, हमारा यहाँ आदर नहीं होता, भगवान ने तुम्हारी जिठानी कुछ सोचो, फिर तुम भगवान की पूजा नहीं कर रहे, भगवान का विवरण नहीं कर रहा, वो अपना कर रहा। वही जब अपने गुरु से भगवान का विवरण मांगा, बहुत ही अलग क्यूंकि मेरे गुरु के विवरण में भगवान तो बहुत अच्छे, बहुत प्यार करते है, बहुत चिल्डआउटहै चिल्ड आउट के निर्गुण ने बाबा जी को बाबा जी के उपवास करूँगा, भगवान खुश जायेगा क्या बाबा जी सबसे पहले तो तू कहना रहा की तेरे भगवान दुखी, अगर दुखी तो भगवान किस बात का करना चाहिए और तेरे उपवास से भगवान को क्या। ये तो ऐसी बात हो कि बाबाजी में अपना ग्लास भर पानी अगर समुन्द्र में डाल आया तो समुद्र में सुनामी आएगी। क्या तुम कोशिश करके देख लो, भगवान को लेना देना नहीं, मैं उपवास क्यूँ कर रहा हूँ ताकि तू डीटॉक्सीफाई कर सके, इतने टॉक्सी लेते, अन्दर अभी छोले बटूरे खाकर बैठा है, न उपवास करेगा, डी टॉक्सीफाई होगा, अच्छे से होगी चेतना उठेगी, फिर भगवान से जुड़ पायेगा। तू भगवान के लिए उपवास नहीं कर रहा, अपने स्वास्थ के लिए कर रहा है। भगवान तो तुझ से प्रेम करते हैं रे।