Ishan Shivanand explains that only people who adapt to constant change—economic, governmental, social—succeed. He uses a glass metaphor: strong glass handles stress and change, weak glass breaks easily. E-commerce is reshaping traditional business, and mental resilience is essential to keep pace.
Chapters
जीवन में 1 के बाद 1 सिचुएशन बदलेगी बदलती है, बदलती आई है, बदलती रहेगी, इकॉनमी बदलेगी, गवर्नमेंट बदलेगी। और जो बदलाव के साथ चलते हैं, वही सफल है, उन्हीं का विकास है। और जिनका ग्लास ही फट गया, बदलाव के साथ, वो बह जायेंगे, फिर दुकानों से माल पे, इकॉनमी बढ़ जाएगी, माल से ई कॉमर्स पर बढ़ जाएगी। और ये अभी तक ठेला लेकर चलते हैं। आलू ले लो, भिंडी ले लो कोई खरीदेगा। क्योंकि अब तो ई कॉमर्स की दुनिया आ गई। बोलो मानते हो, हाजी नाजी, अगर तुम्हारा ग्लास ही फट गया तो विकास होगा कैसे? और इसी ग्लास के फटने को स्ट्रेस। कहा जाता है कि जब बदलाव के साथ तुम आगे बढ़ ही नहीं पा रहे। और जब सिचुएशंस बदलती है तो तुम घबरा जाते हो, तुम हो जाते हो। ठीक है, बीमारी आई आती है, सबके आती है, लेकिन कुछ की बीमारी आती है, ग्लास पड़ जाता है, फिर उसी बीमारी को पकड़ कर बैठ जाते है। टिल डेट डोस। अपा कुछ जिनका ग्लास ताकतवर है तब उसमे प्रकृति तब तक पानी डाल दे, ठंडा पानी डाल। 2 उनका ग्लास सही रहेगा और यही देखा गया आज की तारीख में 2 ही प्रकार के लोग हैं, 1 जिनका ग्लास ताकतवर है, दे कैन, डील, विथ स्ट्रेस और 1 दिन का क्लास कमजोर है टूटने को तैयार।