Ishan Shivanand argues that intelligent, hardworking people struggle to turn their minds off, staying in work mode even at home. Spiritual practice teaches you when to switch off, making space for your spouse, children, and small pleasures like a car ride or garden tree.
Chapters
जो ज्यादा समझदार हो जाता है, उसको अपना दिमाग स्विच ऑफ करना आता ही नहीं। और आज की तारीख में समस्या ही ये है कि जो व्यक्ति ज्यादा समझदार है, जो व्यक्ति ज्यादा काम कर रहा है, ऐसा नहीं है, क्रिएटिविटी की कमी है, ऐसा नहीं, हार्ड वर्क की कमी है, बहुत हार्ड वर्क है, इतना हार्ड वर्क है की समझ ही नहीं आता कि दिमाग स्विच ऑफ कैसे करू। दिमाग हर समय ऑन है, हर समय आन की अगर हम काम से घर भी वापस आ जाए, हमारा शरीर घर में है, लेकिन हमारा सर कहाँ पर है। अभी तक काम कर रहा है। तुम्हारी बॉडी नाइन टू फाइव करती है, लेकिन तुम्हारा दिमाग ट्वेंटी फोर आवर्स, हाजी नाजी बोलो। मैंने उसको कहा देखो, ऐसा नहीं है। साधना से मैं तुम्हे स्विचन होना, सिखाऊंगा साधना से मैं, तुम्हें सिखाऊंगा कि कब तुम्हें स्विच ऑफ होना है, कब गोबी और बच्चा साइड रखना है ताकि, कभी न कभी तुम, तुम बैठ के शांत तो हो अपना ये ये जो अपने सर पर इतना भार लेकर बैठे हो, साइड रखो तुम्हारा 1 बच्चा भी है थोड़ा इंजॉय तो करो तुम्हारी 1 पत्नी है, थोड़ा सुख तो लो, जीवन में, सुख भी तो लेना है। इतनी बड़ी गाड़ी खरीद ली गाड़ी में, बैठ के थोड़ा ट्रैफिक में डो तो सही, फील तो आये, इतने अच्छे घर में रह रहे हो, तुलसी का पेड़ लगाया है, उसमें पानी डालो, थोड़ा मजा तो आए मेरू ला कर रखा है, 12 करो बंदर, थोड़ा मजा तो आया।