Ishan Shivanand describes a Shiva-yogi as someone with inner divinity who attracts divine energy like a magnet. When your inner stagnation melts, don't blame others—intensify your spiritual practice instead. Become more divine than yesterday.
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जो शिव होगी है, वो जीतेगा उसके भीतर अदा होगी। वो गुलामी में विश्वास ही नहीं करता। गुलामी का मतलब क्या है, पकड़ के कुछ कर डालो तो ग्रहों को भी गुलाम बनाने की कोशिश करेगा। और शिव योगी सहज है, सरल है, कहता है मैं मैं जीतूंगा मैं क्यूँ किसी को गुलाम बनाओ? मैं तो मैं तो इस प्रकार से चमकूँगाकीमेरेशिर स्वयं चल कर मेरी ओर आ जाए। शिव योगी भागीरत के समान है। जहाँ वो जाता है, गंगा उसके पीछे पीछे आती है। उसको गंगा को अंत करने लाना पड़ता लाइक एनर्जी, अट्रैक् लाइक एनर्जी। अगर तुम दिव्य हो, खुश हो, तेजोमय हो, तुम्हारे पीछे दिव्यता चले। अगर तुम्हारी बर्फ पिघल रही है। आज से किसी को ब्लेम मत करना, न अपने बगल वालों को, न अपने परिवार को, न ऊपर वाले को, न गुरु को। अगर बर्फ पिघल रही है, तो यह ब्लेम करने का समय नहीं, यह साधना बढ़ाने का समय है।