Ishan Shivanand argues that impulsive reactions harm relationships because nature judges actions, not intentions. He shares how his unexpressed emotions and a violent reaction created distance from his son and wife, showing that only expressed actions shape how others perceive you.
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अगर जीवन में विजन नहीं है, तो तुम सोचते ही नहीं। तुम क्या कर रहे हो? मैं क्या चाहता था, अपने अपने पुत्र से प्रेम चाहता। मैंने प्रतिक्रिया की और प्रतिक्रिया क्या थी? मेरी पत्नी है, वो मेरे बेटे से प्यार कर रहे है, और मेरा बेटा मेरी पत्नी से प्यार कर रहा है। मुझे भी यही प्रेम चाहिए। तो शाकशाकट सोचे समझे कुछ फेंको और मैंने सोचा ही नहीं। जो व्यक्ति प्रतिक्रिया में लीन है, वो सोचता ही नहीं कि उसके एक्शन का कौनसीक्वेंस क्या होगा और फर्क नहीं पड़ता तुम्हारी इंटेंशन क्या थी क्यूँ की जो प्रकृति है वो इंटेंशन नहीं देखती, वो एक्शन देखती है, क्या फर्क पड़ता है? मेरा इंटेंशन था कि मैं अपने पुत्र से खूब प्रेम करूँ। एक्शन मैंने क्या दिया, एक्शन तो 1 ऐसा दिया जो बहुत वायलेंट था, याद रखना, जो भाव बाहर निकाला ही नहीं, जो भाव तुमने दर्शाया ही नहीं, प्रकृति के लिए, वो भाव असली है ही नहीं, तुमने अपने माँ बाप को नहीं बोला, तुम उनको आदर करते हो, प्रेम करते हो, मन में है, लेकिन जीवन भर और मृत्यु के समय वो यही सोचेंगे कि मेरे बच्चे मुझे प्रेम नहीं करते, क्यों कभी निकाला नहीं हे।