Ishan Shivanand teaches Shiv Yoga practitioners to accept their inner goodness through the mantra "मैं अच्छा हूँ और बेहतर होता जा रहा हूँ" (I am good and becoming better). He says miracles happen when you truly accept the divine within yourself, and that God's love doesn't depend on effort but is already there.
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तो अगर शिव योगी हो, जीवन में चमत्कार हो रहे हैं, तो अब तुम्हे भी प्रोएक्टिव होना पड़ेगा कि ये चमत्कार भी है, हो सकता है हाजी जी, और ये तब होगा। अगर स्वीकार करोगे। मैं अच्छा हूँ और बेहतर होता जा रहा हूँ। मैं फिर कहता हूँ, मैं अच्छा हूँ और बेहतर होता जा रहा हूँ। आखिरी बार मैं अच्छा हूँ और बेहतर होता जा रहा हूँ। वह ताली बजा अपने याद रखो। शिव योग में भगवान तुम से बहुत प्रेम करते और तुम्हारी मेहनत भगवान के लिए नहीं, इस भगवान के लिए। और इसलिए में तुम्हे प्रणाम करता हूँ। तुम्हारे भीतर के भगवान को प्रणाम करता, क्योंकि जो मैं तुम्हें बता रहा हूँ, अभी तुम सुनोगे जैसे जैसे आईना खिडकी बनेगा, समझानी शुरू होगी। और मजे की बात उस दिन समझने की भी जरुरत नहीं मैं, बोलूंगा बाद में तुम्हे दुखाईपहलेलेजायगा, तुम्हे अनुभव पहले ही होना शुरू हो जाएगा। और मैंने ऐसे भी सहयोगी देखे तो शिविर में बैठे होते हैं और हजारों की भीड़ में उनको लगता है बाबा जी से उनसे बात कर, उनको लगता है पंखा स्लो मोशन में सदर रहा है, उनको हर समय भैया की बोली सुनाई देती है, तितली उड़ती दिखाई देती है और उनको लगता है उधर से। बाबा जी केवल उनके ले चलते, चलते यहाँ आकर बैठते है और केवल उन्ही को देख रहे हो। तुम सोचो, अगर तुम वैसे शिवयोगी हो तो जीवन में कितना अच्छा लगेगा, आज ही नाचे। why not be also feel the same poitry that we re out, but this potere start from acceptance accept the god that is in u and around। you me fir kahta wow accept the god that is in and around, you accept the god that is in यू एंड अराउंड you। मेरे बच्चे अच्छे हैं और बेहतर हो रहे हैं। मेरी पत्नी भी अच्छी है, सम्मानित और बेहतर हो रही है, मेरा देश भी अच्छा है और बेहतर हो रहा है।