Ishan Shivanand uses atomic bonding to explain how consciousness works like an energy-binding force. Your awareness shapes what you see: negative consciousness makes even divine figures appear as enemies, while positive consciousness lets you perceive the divine in a stone, as the poet Meera Bai did.
Chapters
hidrोजonatam forms a band with oकceजonatmandforms the molicul finit हाइड्रोजन से ज्यादा मान लो कार्बन के साथ थे जहाँ आपने कार्बन को इंटरड्यूस किया तो वो हाइड्रोजन को त्याग के कार्बन के साथ बांड कर लेगा और फिर वो सीओ टू या कार्बन डाइऑक्साइड या कार्बन मोनोक्साइड कुछ कुछ ऐसा निर्माण कर लेगा और तुम ये सोचो की 11 एटम एफिनिटी दर्शा रहा है तो तुम किस चीज के बने हो हाँ जी, ना जी और अगर एटम के अन्दर पॉवर है की किसी और चीज के साथ जुडना और उस चीज के साथ जुड़े रहना उसी प्रकार से 1 व्यक्ति के भीतर भी पॉवर है कि चेतना के अनुसार 1 ऊर्जा के साथ जुड़ना और फिर ऊर्जा से जुड़े रहना अगर चेतना नकारात्मक है तो तुम्हारे सामने मैं भगवान राम भी खड़ा कर दूं तो तुम रावण बने, भगवान राम में भी दुश्मन ढूंढ लोगे और अगर चेतना सकारात्मक है तो मैं तुम्हारे सामने पत्थर भी डाल 2 तो तुम मीरा बाई बने पत्थर में भी भगवान कृष्ण को स्वीकार कर लोगे इस बात को समझो ये सारा खेल चेतना का है रे।