Ishan Shivanand argues that modern society pushes us toward robotic standardization, replacing human workers with machines and crushing individuality. He describes a company that cut thousands of jobs down to a few hundred, leaving survivors stressed and afraid of being replaced next.
Chapters
इस सोसाइटी में बहुत जरुरी है कि मार्गदरशन ये सोसाइटी बहुत अच्छी है, बहुत मजेदार है लेकिन इस सोसाइटी में चाहे सुख है, चाहे स्वाद है लेकिन इस सोसाइटी में फिर पीडा भी पहुँच जाता है और पीड़ा क्यों क्योंकि इस सोसाइटी में हर चीज की डेफिनेशन है, खूबसूरती का मतलब, ये स्प्रिचवैलिटी का मतलब, ये सब कुछ इंडस्ट्रियल स्केल पर रोबोटिक और अगर हम रोबोटिक सोसाइटी में रहते हैं तो फिर समस्या भी यह है की इंसान रोबोट से रिप्लेस हो जाएगा मैं कंपनी में साधना बहुत बड़ी कंपनी, बहुत बड़े बड़े विमान मनाती है और वहाँ पर लोग बहुत दुखी थे, क्यूँ दुखी थे क्योंकी अब जितना भी वर्क फोर्स है रोबोट से रिप्लेस हो रहा है, पहले वहाँ हजार एम्प्लॉय काम करता था, अब 5 सौ एम्प्लॉय काम कर रहा है, अब वो जो 5 सौ एम्प्लॉई है उसपर बहुत स्ट्रेस है क्योंकि अगर वो 4 बंदों का काम नहीं करेगा कल को कंपनी उसको भी रोबोट से रिप्लेस कर देगी और वो दुखी इसलिए है क्योंकि उसको तो बताया गया था अगर ये पढाई करोगे, ऐसा करोगे, ऐसा करोगे, ऐसा करोगे सक्सेसफुल हो जाओगे। उसने तो अपने आप को फोड की असेम्बली लाइन में डाल दिया और फोट की असेम्बली लाइन का मतलब ये है की हमें यूनिकनेस नहीं चाहिए, हमें स्पेशालिटी नहीं चाहिए, हमें जंक चाहिए, हमें 1 इंडस्ट्रिलाइजेशन चाहिए।