Ishan Shivanand traces how value lives in the mind, not in objects. A Nike shoe and an unbranded shoe from Kanpur are made the same way, but logos inflate what we think they're worth. Buddha's encounters with suffering changed how he saw life. The price of everything starts in your head.
Chapters
कहते हैं। गौतम बुद्ध ने 11 बीमार व्यक्ति को देखा, गौतम बुद्ध ने 1 बुजुर्ग को देखा और 1 मृत को देखा। और इन तीनों को देख उनकी जिंदगी बदल गयी। कहने को क्या है तुमने, कितने मृतों को देखा है, तुमने कितने बीमार को देखा है, न जाने कितनी बार तुम्हारे गुरु ने चीख चीख कर कहा होगा तुमको हो जाओ, न जाने कितनी बार तुमने गाना भी सुना होगा। लेकिन अगर चाहो तो कुछ भी नहीं। और अगर चाहो तो सब कुछ की, यहां से आती कीमत, यहाँ से आती कीमत दिमाग से आती किसी भी चीज की कीमत दिमाग से आती उदाहरण है। तुम 1 शॉपिंग माल चले जाओ। सारी की सारी कमीज वहीं बांग्लादेश में बनी होगी, सारे के सारे जूते वहीं कानपुर में बने होंगे, सारे के सारे फुटबॉल शायद पाकिस्तान में बनी होगी। लेकिन था नाइकी का ठप्पा लगा। 2 प्राइस बढ़ जाएगा, क्या ये नाइ की कुछ नहीं, सब कुछ क्या है, गुची कुछ नहीं, सब कुछ। हाँ जी, ना जी, जी, ना जी, रोलेक्स टाइम, एक्स सेम टाइम दिखाती, लेकिन क्या ये रोलेक् कुछ नहीं, लेकिन सब कुछ खुद देखो।