Ishan Shivanand argues that logic alone won't protect you from machines. To stay relevant, you need creativity, imagination, and lateral thinking. He says sadhana, or spiritual discipline, awakens the inner divinity that machines can't replicate.
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अगर तुम चाहो, तुम्हें पशु भाव में जीवन जीने की जरूरत नहीं, तुम देव भाव तक पहुँच सकते हो। 1 गुरु तत्व भी है जो इंसान के केवल लॉजिक माइंड को ताकत नहीं देता पर उसकी क्रिएटिविटी को भी ताकत देता है। क्यूँ क्यूँकि अब क्रिएटिविटी जगानी होगी, अगर में रेलेवेंट होना है। माना पिछले 30 साल से हम लॉजिक ओरियंटिड पढाई कर रहे हैं, तर्क ओरिएंटिड पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन अगर तर्क में इंसान और मशीन को भिड़ा दोगे, मशीन जीत जाएगी। क्रिएटिविटी में तुम्हारा मुकाबला ने अभी तो नहीं। और इसलिए इंसान को मशीन से मुकाबला नहीं करना, लेकिन इंसान को अपने भीतर की दिव्यता बढ़ाने हमारे भीतर 1 ताकत है, भाव की ताकत हमारे भीतर 1 ताकत है, इमेजिनेशन की ताकत हमारे भीतर 1 क्रिएटिविटी है। हर बच्चे को वो लैटरल थिंकिंग अपने भीतर लानी होगी और ये लैटरल थिंकिग केवल और केवल साधना से आ सकती और अगर नहीं आएगी तो फिर वही व्यक्ति फंस जाएगा।