Ishan Shivanand explains how gratitude strengthens spiritual practice. Feeling lost or disconnected during meditation is normal and not failure. What matters is the real change in your life after practice, not the sensations during it.
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1 शिव योगी के जीवन में अच्छा ही होगा। 1 शिव योगी के जीवन में अच्छा ही होगा और इसका मतलब ये धन्यवाद का जो मिलने वाला है उसके लिए धन्यवाद। जो मिल रहा है उसके लिए धन्यवाद, जो हुआ उसके लिए धन्यवाद। क्यूंकी इस धन्यवाद के भाव से तुम्हारी दृष्टि बदलेगी, चेतना, बदलेगी, चेतना, जब बदलेगी अपने आप एफिनिटी बदलेगी हर 1 इंसिडेंट से या तो हम इवॉल्व होते हैं या एक्स्टेट और अगर धन्यवाद का भाव होगा साधना की भी ताकत पड़े कहने का मतलब ये कि अगर साधना में तुम्हे लगे शरीर छूट गया, तुम कुछ लोग देख कर के वापस आ गए का क्या भाव हो धन्यवाद शिव योगी के साथ अच्छा ही होगा। अगर साधना के दौरान तुम्हे ऐसा लगे तुम खो जाओ या मेरी आवाज़ सुनते सुनते तुम्हें सुनाई नहीं पड़ रही फिर भी सोचना नहीं क्योंकि 1 शिव योगी के साथ अच्छा ही होगा। याद रखना शिवयोग में हम साधना की कीमत इस बात से तय नहीं करते की साधना के दौरान तुम्हे क्या अनुभव हो रहा है लेकिन साधना की कीमत तय की जाती है इस बात से की साधना के बाद जीवन में क्या क्या बदलाव हो रहा है। तो साधना के दौरान जो हो वो तो सोने पर सुहागा लेकिन 1 बात जो हमें बहुत ध्यान से देखनी है की साधना के बाद जीवन में क्या क्या बदलाव हो रहा है।