Ishan Shivanand argues that your mind is torn between love and destructive temptations like anger and addiction. When anger outweighs love, you act blindly and cause harm. He points out that science meant to cure disease gets diverted to weapons instead, and urges you to direct your energy toward the happiness of people you love.
Chapters
तुम्हारा मन, हमेशा 2 स्थानों में टपूसियाँमारेगा, पहला स्थान, शराब, दूसरा। वरदान जब कभी भी तुम्हारा मन करे, फलाने को मैं कुछ कर डालूँ। याद रखना कोई न कोई है जो तुम्हारे प्रेम का भी भूखा है। क्यों ना तुम अपनी ऊर्जा, अपने रिसोर्सेज को इस्तेमाल करो उन लोगों की खुशी में जिनको तुम प्रेम करते हो, ना कि अपने रिसोर्सेज को, व्यर्थ गवाओ उन लोगों को दुख देने की कोशिश में जिसे तुम घणा करते हो। और मैं क्या कह रहा हूँ, दुख देने की कोशिश। क्यों तुमने सबा बिठाई है? और तुम कोने में सबा बिठा के कुड़ कुड़ कुड़ कुड़ कर रहे हो। मजे की बात जिसके बारे में कुड़ कुड़ कर रहे हो। वो तो अपना जीवन मजे से जी रहा है, नकारात्मकता किसने उत्पन्न की, किसको भोगनी पड़ी, किसको खानी पड़ी, तुम्हे जी, ना जी, उस तक तो कुछ पहुचेगा नहीं। वो तो अपना कट गया है किसने अपना जीवन व्यर्थ गवाया किसने अपनी लंका जलाई, किसने अपने भाई को भी गवा दिया क्यूँ? क्योंकि जब क्रोध प्रेम से ज्यादा बढ़ जाता है, तब इंसान अंधा हो जाता है। तब जहाँ विज्ञान का इस्तेमाल होना चाहिए, बीमारियों का नाश करने में, जहाँ विज्ञान का इस्तेमाल होना चाहिए, ये सीखने और समझने में की किस प्रकार से भुखमरी मिटाई जाए और वही विज्ञान का इस्तेमाल होता है हथियार बनाने में की किस तरह से सामने वाले को पीटा जाए, वही विज्ञान का इस्तेमाल होता है। malt।