Ishan Shivanand traces stress to uncertainty: fear of death, the unknown afterlife, and life milestones like marriage and children. He argues that without inner steadiness and mindfulness, the mind stays shattered. By focusing on the present and building inner fire, you can dissolve fear and live without dread.
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सबसे पहले तो समझो स्ट्रेस आता क्या? सबसे बड़ा कारण है? वह अनसरटेनिटी क्या होगा? क्योंकि कुछ का है। सबसे बड़ा डर यह है क्या होगा लोग? मृत्यु से डरते क्यों है? क्योंकि हमें पता ही नहीं मृत्यु के बाद होगा। क्या? कोई कहता है? काले सांड पे बैठ के आयेंगे, यमराज तोंद वाले बड़ी मोच डंडा लेकर हमे डर डंडे से क्या करेंगे सोचो। अगर हमें गारंटी पता हो कि मरने के बाद यमराज जी नहीं आ रहे। बहुत सुन्दर अवसर आ रहे हैं, नीली नीली आँखों वाली। तो हम यह नहीं पूछेंगे कब मरेंगे? हम पूछेंगे कब मर रहे है? हमे पता ही नहीं क्या होगा? और इस चीज का डर है। अनसर्टेनिटी भैया, हमारी शादी कब होगी? मुझे क्या पता, जब तुझे करनी है, कब होगी? अच्छा भैया हो गई तो क्या हम खुश होंगे? अच्छा चलो खुश हो भी गए, औलाद कब होगी? अच्छा चलो औलाद हो भी गई, कौन सी होगी? लड़का होगा या लड़की? अगर लड़की हो गई, हमें जलाएगा कौन? मैंने कहा गर ऐसा है, ट्राई करके देख लो, पक्की बात, लड़की के हाथ की, लगाई भी चलेगी। फिर मैं पूछता हूँ भाई, अभी तो तू केवल 12 साल का है। ऐसे सवाल क्यों पूछता है? नहीं, मैं 15 मिनट अपनी मम्मी के साथ बैठा था। वो तो और भी ज्यादा डरी हुई है। अनसर्टेनिटी अगर बार बार अनसर्टेनिटी के बारे में सोचोगे तो ग्लास फूटेगा, पाका फूटेगा और फिर चाहे साधना की तुम कोशिश करो। ध्यान लगेगा नहीं क्यों, क्योंकि ग्लास फूटा हुआ है। ऐसे पात्र में अमृत भी अगर डालो बैठेगा नहीं। अंदर ऐसे आदमी को तुम सुबह प्रेम करो शाम तक बे जाएगा, दुखी हो जाएगा। तो अगर अंसेटेनिटी से बचना है। तो सबसे पहली चीज अपने जीवन में जो तुम्हे लानी होगी, वो है तब क्या?