Ishan Shivanand argues that true influence comes not from preaching but from being authentically happy and confident. When you radiate joy and flourish in your own life, others naturally listen and feel inspired by your presence without you trying to convince them.
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मेरे भीतर तो इतनी शक्ति है, मैं शिव योगी हूँ, तुम अपनी शक्ति को समझो, तुम्हें क्या परिवार, किसी को खुश करने की तुम बस होना, तुम्हारा होना काफी होना चाहिए, तुम बस होना और तुम्हारे होने में लोगों को प्रेरणा मिलेगी, तुम्हारे होने में लोग चौंक जायेंगे। तुम्हारे पास आयेंगे बोलेंगे कैसे क्या हो तुम देखना जिसके लहलहाते बाल हैं, उसी के पास आदमी जाके। पूछता है तुम्हारे बाल इतने सुन्दर कैसे टकले के पास कोई नहीं जायेगा और जो कह रहा है कि मेरे पास मेरा परिवार पूछने नहीं आता, कौन सा शैम्पू लगा। मेरे पास तो सारा ज्ञान है, बालों को सुन्दर कैसे बनाना है परिवार? तो सबसे पहले बोलेगा ये तो टकला कैसे हुआ? और अगर तू हमें ज्ञान देता और जिसके बाल सुंदर है वो फिर कुछ भी बोल दे, इतना ही बोल दे की अंडे फोड़ पर देखना फोड़ने वाला फोड़ेगा क्योंकि सामने वाले में दिखता है, अगर तुम खुश नहीं और तुम बाबा के पास आके, मेरा बच्चा मेरी सुनता नहीं, मैं तो उसे सारे रास्ते दिखा सकता हूँ क्यूँ वो तुम्हे देख रहा है की अगर तुम सारे पपीते की तरह 1 कोने में बैठी तो तकले ऐसी बालों के बारे में कौन पूछेगा प्यारे। लेकिन अगर तुम खुश हो, अगर तुम मुस्कुरा रहे हो, अगर तुम प्रफल्लित हो, अगर तुम देवी हो और तुम दुनिया को, तो ये करो, तो तुम जो बोलोगे सामनेवाला सुनेगा मानेगा, इज्जत करेगा तुम्हारे शब्दों के।