Ishan Shivanand argues that harsh words create friction in your life and karma. Negative speech, even when justified, only deepens conflict. Instead of blame, practice gratitude and wish well-being on others to protect your peace.
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why walk on the part of friction? फ्रिक्शन का मतलब पानी में भागना बहुत मुश्किल है, जितनी फ्रिक्शन होगी उतना तुम्हारा कर्म मुश्किल हो जाएगा, जितना तुम लोगो को गालिया दोगे, बुरा बोलोगे अंटशंट बोलोगे तुम्हारे जीवन में फ्रिक्शन उतनी बढ़ जाएगी। और सबसे बड़ी बात किसी और को गाली देने से तुम बड़े थोड़ी न होगा। न जाने क्यों कुछ लोगों से बात करता है। वो कहते हैं भैया हम बुरे हैं, लेकिन ठीक है क्योंकि सामने वाला और ज्यादा बुरा है किसी और के और बुरे होने से तुम अच्छे नहीं हो जाते, तुम अपनी लड़ाई को कभी ध्यान से देखना, तुम्हारी माँ कहती है तुमने ये क्या तुम बोलते हो अच्छा और जो तुमने वो किया तो जहाँ लड़ाई होनी चाहिए इस बात के लिए की अच्छाई कैसे बढ़ाई जाए। अब बताया जा रहा है कि कितनी बुराई जस्टिफाइड है और कितनी अनजस्टिफाईड है। देखो बुरा कभी जस्टीफाई नहीं हो सकता, चाहे किसी भी चीज के लिए क्यों न तो अगर इस फिक्शन से बचना चाहते हो और अपने ग्लास को बचाना चाहते हो तो सबसे पहले तो अपने भीतर 1 भाव लेकर के आओ क्या है वो भाव धन्यवाद क्या फिर से कहता हूँ क्या साथ ही साथ ब्लेयू क्या क्या ब्लेस का मतलब गाड़ी चला रहे हो किसी ने देख के हरण मारा क्या पता प्रकृति कैसे तुम्हारा भला कर दे, हारण मार रहा है गाली देने से अच्छा खिड़की नीचे करो हे तेरे घर में बाप भाई है, हाँ है क्या ब्लेस देम लगे क्या बोला ब्लेस तेरे घर वालों को ब्ल्यू नहीं, तेरे घर वालों को ब्लेस करम, क्यों इकट्ठा करो तुम क्या जरुरत है अगर कल को, कल को, अगर तुम्हे पता नहीं क्या चीज तुम्हारे लिए बढ़िया maंcaneगेर।