A woman describes how a stranger on the Delhi metro returned her son's forgotten admission documents, and recounts multiple instances of mysterious helpers appearing during her solo travels to Goa and Mumbai. She credits these interventions to her guru Shiv Ananda and the protective presence of the Shiv Yoga tradition.
Chapters
मुझे 1 शिवयोग लगता है। व 1 बार बेटे के एडमिशन के लिए दिल्ली गई थी। वहाँ लोकल बस में अपने जन्म से लेकर काउंसलिंग तक के सारे ओरिजनल डॉक्यूमेंट्स बस मैं भूल गया। बस में हम उतरे और बस रवाना हो गयी और तुरंत ध्यान आया कि इसमें डॉक्यूमेंट्स बस मेरे छोड़ दिए। मैं घबरा गई कि अब क्या करूँ। बस कौन सी थी यह भी पता नहीं। तब जाने कहां से बिना मौसम बारिश की 1 फुहार सी मुझ पर आई और बाबा जी के शब्द याद आए शिव कृपा। तभी अचानक मेरे बड़े बेटे का जो उस वक्त काशी में था, फोन आया कि किसी ने तुरंत फोन किया है उसके पास आपके डॉक्यूमेंट्स हैं और जिस लोकल मेट्रो में आप बैठने वाले हैं उसी में आकर वो डॉक्यूमेंट दे देगा। वो व्यक्ति जाने कौन था। 1 मेट्रो स्टेशन पर ट्रेन रुकी तो कहीं से वो व्यक्ति ट्रेन पर चढ़ा कौन था वो उसे क्या पता कि मैं कौन सी मेट्रो में हूँ और कहाँ बैठी हूँ डायरेक्ट वो 1 स्टेशन से चढ़ कर हमारी तरफ कैसे आया। बस में से वो बैग उसे कैसे मिला और बैग हमें देते हुए तुरंत वो कहाँ गायब हो गया। आज भी रोंगटे खड़े हो जाते। वो याद करके वो रूप बदल कर आए बाबाजी थे या उनकी लीला से कोई शिवगण। पर। कई बार जब भी मैं अकेली शिविर करने आती गोवा, मुंबई, दिल्ली, कहीं न कहीं से कोई आकर कभी मेरा लगेज उठा लेता, कोई रास्ता बता देता, कोई शिविर तक छोड़ देता, अकेले लगता ही नहीं कि मैं कैसे जाकर शिविर कराती। शिवानंद हमेशा साथ होते हैं और आज भी प्रति दिन प्रति क्षण गुरु साथ हैं। भैया आप जो शिव योग परंपरा का निर्वाह कर रहे हो, बाबाजी ने बड़ी मेहनत से आपको हमारे लिए और आने वाली नई जनरेशन के लिए तैयार किया है। हम साक्षी हैं कि किस तरह आप शिव योगी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए दिन रात मेहनत करते हेतु। पूरे विश्व में हमारे गुरु के सपने साकार कर रहे हो। आप हमेशा हमारे साथ हो और हम सब भी शिव योगी, शिव योगी आपके साथ हैं। bless you।