The next war isn't between nations but inside you, against laziness, bad habits, anxiety, and comparing yourself to others. Your shadow—the weight of your negative traits—is real. Confront it to find peace and become who you want to be.
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जिस महायुद्ध की मैं आपसे आज बात कर रहा हूँ वो महायुद्ध 2 देशों के बीच नहीं है, वो महायुद्ध 2 कामों के बीच भी नहीं है, वो महायुद्ध है आपका अपने आप से और वो आपकी लड़ाईहै, आपके आलस से, आपकी बुरी आदतों से, आपकी नाकामियों से, आपके स्ट्रेस से, आपकी एंजाइटी से, जब हर बार आप आईने में अपना चेहरा देखते हैं और आप सोचते हैं कि आप ऐसे क्यों हैं जब आप कंपेरिजन करते हैं। अगर आप स्टूडेंट हैं तो आप बाकी बच्चों को देखते हैं, उनका पढाई में दिल लगता है, आपका शायद नहीं लगता है, आप अपने परिवार को देखते हैं और परिवार मंदिर में बैठा है, भजन पूजा कर रहा है, खुश हो रहा है और आप आंखें बंद करने की कोशिश कर रहे हो ऐसा नहीं है कि आप नाश्ते को लेकिन आपका ध्यान नहीं लग रहा अगर आप कोशिश कर भी रहे हो तो आपको पता नहीं कि ऐसा मैं क्या करूँ जिससे मैं एटलीस्ट 1 फंक्शनिंग नॉर्मल तो बन सकू ताकि मैं अपने परिवार के साथ जब आँखें बंद करूँ तो मेरे मन में शांति उत्पन्न हो और नकारात्मकता का बंदर तपसियां न मारे हो सकता है आपने बहुत सारे लोगों को देखा हो, बहुत सारे लोग अपने जीवन को 1 स्वस्थ तरीके से जी रहे हैं और आपको नहीं समझ आता कि आपको भूख शायद ज्यादा लगती है या कचरा ज्यादा खाते हो और आपके भीतर दूसरों की तरह शायद अभी वो स्टेमिना या हेल्थ नहीं है और हो सकता है काफी सारे लोग जो मुझे सुन रहे हैं दे हैव बिकम यूज टू दिस पार्ट ऑफ द सेल्स ये जो हमारे अन्दर की 1 शैडो होती है 1 परछाई जिसको हम पसंद नहीं करते और ये परछाई वो परछाई है जिसके अंदर हमारी सारी बुरी आदतें हैं, हमारी बुराइयां हैं, हमारी नाकामियां हैं और जब कभी भी ये परछाई कोई ऐसी हरकत करती है जिससे हमें आत्मग्लानी महसूस होती है या ये परछाई कुछ हमारे जीवन में दुख लेकर आती है तब हमारे भीतर 111 भाव जगता है कि मुझे इस परछाई को हराना है मुझे इस परछाई से जीतना है।