Ishan Shivanand explains that true knowledge comes only from a guru, not books. A guru who is awakened and a siddha can transmit cosmic understanding directly to disciples, like a receiver connecting to a source, granting insight impossible through ordinary study.
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ज्ञान और सत्संग का मतलब क्या है? सत्संग का मतलब है हम कुछ ऐसा देखे जो हमारे मन को चैलेंज करे, जिससे हमें कुछ नया सीखने को मिले। गुरु कौन जो ज्ञान हमें वो दे, जो कोई और नहीं दे सकता, जो चीज तुम्हें पता है, जो चीज तुम्हारे सुनी सुनाई है, जो चीज का तुम कनफर्मिजमढूँढरहे हो और वो चीज गुरु बोले, हमें उनकी बातें पसंद है। वो गुरु जी क्यूँ क्यूंकि? जो हम सोचते हैं, वो वैसा बोलते हैं। भैया तुम अगर सोचते ऐसा हो, इस लिए तो तुम कलयुग में बैठे। अगर कुछ और सोचते होते तो तुम तो में बैठे हो। क्यूँकी मेरे गुरु ने जो मुझे ज्ञान दिया, शक्ति दी, साधना की मुझे किसी ग्रंथ ऐसी नहीं मिला, क्यूंकी हम कम जाते थे ग्रंथों के पास, हम जाते थे गुरु के पास, और जो गुरु है, वो जाग्रत है, जो गुरु है, वो सिद्ध है, प्रसिद्ध ग्रंथ को जी चुका है, सिद्ध ग्रंथ को पहचान चुका है। सिद्ध ने ग्रंथ की वाणी को ब्रह्मांड से सुना है। क्यूँकि वेद की रचना भी तो ऐसे ही हुई। सेलेस्टियल साउंड्स ऑफ द यूनिवर्स हर्ड बाय द सिन तो तुम छेड़छानी कर। 2 हमारे पास यहाँ पर रिसीवर तो बैठा है, वो फिर कनेक्ट करेगा और हमें ज्ञान प्राप्त हो जाएगा।