ईशान शिवानंद says children need love, time, and guidance from parents, not expensive schools or gadgets. A seed needs sun, not a lamp. When parents repeat their advice with affection, it becomes the child's inner voice for life.
Chapters
जो प्रेम माता पिता अपने बच्चों को देते हैं, उस प्रेम से बच्चा आगे बढ़ सकता है। तुम खुद सोचो। या तो तुम सूर्य के सामने 1 बीज को रखोगे। और तुम कहोगे कि देखो, सूर्य के पास जाने का तो समय है नहीं। मैं 1 बजाज का बल्ब लगा देता हूँ। बीज के सामने देखता हूँ, उससे क्या होता है। हो सकता है बढ़ जाए पौधा, लेकिन बल्ब सूर्य का विकल्प नहीं होता। उस महान आदमी ने खूब अच्छी टूशन खरीद ली, खूब अच्छा स्कूल खरीद लिया, खूब सारी मेनिया खरीद ली, खूब सारी आया, खरीद ली। लेकिन ये सब कुछ जो खरीदा। बच्चे को तो ये सब चाहिए ही नहीं था। बच्चे को क्या चाहिए था समय, बच्चे को क्या चाहिए था प्रेम, बच्चे को क्या चाहिए थी? दिशा मनोविज्ञान कहता है? हर व्यक्ति के भीतर 1 अंदर की आवाज होती है, जो उसे बताती है, क्या सही, क्या गलत है। और जो सबसे सक्षम लोग हैं, उनके भीतर अंदर की जो आवाज है न, वो उनके माता पिता की। और अगर माता पिता बार बार बचपन में बात करते हैं, समझाते है, प्रेम करते हैं। तो उन्हीं की आवाज अंदर की आवाज बनी। उस बच्चे को मरते दम तक गाइड करती है।