In this Hindi lecture, Ishan Shivanand explains how the human mind rapidly adapts and how our memories are never stored in a complete, immutable form. He argues that memory is constantly shaped by karma, which can cause us to edit, alter, or delete past impressions. Drawing on psychological observations that we only retain images rather than factual history, he illustrates the concept with personal anecdotes—a childhood toy given away at a guru’s request and a domestic misunderstanding that triggered intense emotional reactions. Shivanand introduces the practice of Prati Prasav Sadhan, a systematic method of consciously editing, altering, and deleting negative mental imprints, and links it to Shiv Yoga, which similarly works on the mind’s stored impressions. He emphasizes that while we cannot change historical events themselves, we can transform their impact on us by changing our internal response, thereby converting suffering into inspiration and moving toward a life of happiness, divinity, and purpose.
Chapters
ये जो हमारा मन है न वो बहुत जल्दी अडैप्ट होता है। हम कभी भी किसी भी घटना या वस्तु को पूर्ण स्वरूप से याद नहीं रखते। हमारी जो याददाश है न वो हर समय कर्मों से वशिभूत हो। 1 अलग ही याद का निर्माण कर डालती है। मनोविज्ञान ने कहा है कि वी डोंट रिमेमबर, मेमरी, वी डोंट लिव आउ मेमरी, वी ओनली लिव आउट ऑफ इमेजिनेशन आवर, वर्जन ऑफ हिस्ट्री नोट रियल हिस्ट्री। हम कर्मों के अनुसार कोई चीज को या तो याद करते हैं और याद करते भी है कैसे हम उसको एडिट कर देते हैं, अल्टर करते हैं, डिलीट करते है। एडिट करने का मतलब है कि जो चीज हमें याद रखनी होगी, हम याद रखेंगे, जो चीज भूलनी होगी हम बहुत सरलता से भूल जायेंगे। जब पहली बार मेरे गुरु ने मुझे प्रति प्रश सिखाई थी तो पहले उन्होंने मुझे प्रति, प्रति सबकी साधना कराई। और जब साधना करा रहे थे तो मैंने अपने अपने पास्ट में देखा की जब मैं छोटा था 5 10 साल का, तो मेरे पास 1 बहुत अच्छा खिलौना था। 1 दिन मेरे गुरु आये सामने 1 बिखारी था। मेरे गुरु ने मुझे कहा बेटा अपना खिलौना उस बिखरी को दे। 2 और मैंने तो तुम्हें बताया कि जिस आश्रम में मैं हूँ वहाँ 1 ही चीज होती है। अगर गुरु बोले दौड़ो तो हम पूछते कितनी दूर और छोटा था 8 10 साल का, मुझे अपना खिलौना बिखारी को देना पड़ा। बहुत दुख हुआ, जब ध्यान से बाहर निकला तो मेरे पिता बहुत दुखी, उनको प्रति बरस की जरुरत क्यूँ। उन्होंने कहा दुश वो खिलौना देने के बाद मैंने तुझे 4 और गाडियां दिलाई थी, वो तो तू भूल गया, लेकिन ऐसा ही होता है हम स्वादानुसार चीजें याद रखते एडिटिड एडिटेड, स्वादानुसार जो याद रखना, वो याद रखेंगे जो भूलना होगा ग्रेजुअली भूल जायेंगे इसलिए लड़ते हो सामने वाला, तुम्हे कुछ बोलता है तो हो भाई, तुम अपनी बात को भूल ही गए हो, नहीं होता है ना, हमारी गलती नहीं है, ये हमारा मन है, स या तो मेमरी एडिट हो जाएगी या अल्टर हो जाएगी। अल्टर का मतलब जो हुआ था हम वो नहीं याद करेंगे अपने हिसाब से जो हुआ था हम याद करेंगे। बहुत बार मैं किसी अम्मा से बात कर रहा होता हूँ, वो कहती है भैया, हम तो शांति से बैठे थे, न जाने कहाँ से बढ़ कर के। उसने दरवाजा खोला। मैंने कहा कि मेरे पति ने और धम धम करता हुआ आया। मुझे देखा आँखें एकदम लाल करके और गुर्राया मेरे पे कहा है टीवी का, मैं तो घबरा के गिर गयी, नीचे मेरा दिल तो टूट गया, मेरे को तो लग रहा था मेरी जान ले लेगा। और मैंने पति से पूछा क्या हुआ कहता है, कोई नहीं रिमोट ढूंढ रहा था, आई पी एल आ रहा है पत्नी की मेमरी आल्टर्ड है, सच्ची है अल्टर अल्टर कर लेता है हर समय और तुम ही ऐसे नहीं हो, हर जीव वैसा है। कर्मों के अनुसार मेमरी एडिट होगी, अल्टर होगी और सबसे बढ़िया डिलीट भूल ही जाएगा। और हर व्यक्ति के साथ यह होगा कि वो अपनी मेमरी को कर्मों के अनुसार या एडिट करेगा या अल्टर करेगा या डिलीट करेगा। फर्क सिर्फ इतना है जो शिव योगी होगा। वो भी अपनी मेमरी को एडिट करेगा, अल्टर करेगा, डिलीट करेगा, लेकिन रोज अपनी साधना में वो नकारात्मक को एडिट करेगा, नकारात्मक को अल्टर करेगा और नकारात्मक को डिलीट करेगा ताकि जब वो पीछे मुड़ के देखे उसको अपने जीवन में केवल खुशी सुख और दिव्यता दिखाई पड़े। क्या जरूरत 1 शिवयोग भी एडिट करता है, अल्टर करता है, डिलीट करता है। लेकिन जब वो ध्यान कर रहा है, वो 1 बात को समझता है कि मैं इतिहास को नहीं बदल सकता, लेकिन मैं इतिहास का प्रभाव अपने ऊपर जरूर बदल सकता। हम प्रक्रियाओं को नहीं बदल सकते, लेकिन उनका परिणाम बदला जा सकता है। जहाँ कभी पेड़ के नीचे बैठे थे। सर पर सेब गिरा बहुत दुख हुआ। हमको अगर खुद को बदल देंगे तो जब सर पर सेब गिरा तो आइजक न्यूटन की तरह उस गिरते सेब से हमें प्रेरणा दे दी की हम कृष्ण के नियम लिख दे। जरा चलते जा रहे थे, लाश को देखा, मरे व्यक्ति को देखा, बहुत दुःख हुआ। हमें उस लाश को तो हम नहीं बदल सकते लेकिन खुद को गौतम बुध की तरह जरुर बना सकते कि उस लाश को देख कर प्रेरणा मिली के बुत और शिवयोग की और हम बढ़ना शुरू कर दे।