Ishan Shivanand argues that you must claim victory for yourself or others will define you. Reject labels that mark women, the elderly, and the poor as weak. Digest only positivity and success, and you'll naturally develop a healthy body, strong family, spiritual depth, and well-being.
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you must know, who you are you must become the victor, if you dont become the victor, than somebody will make you a victor, most definitely sorte फिर दुनिया आके तुम्हें बोलेगी, अरे, तुम तो महिला हो, तुम तो कमजोर हो, तुम तो बच्चे हो, तुम तो कमजोर हो, अरे तुम तो पुराने स्टेट के हो, तुम तो कमजोर हो, तुम तो गरीब हो, तुम तो कमजोर हो। बिकम द विक्टर, इफ यू, डू न होल, वर्ल्ड विल, फॉलो यू। और यही मेरी प्रार्थना है आप सब से यही यही मैं चाहता हूँ कि आप सब के जीवन में 1 विक्टर माइंडसेट आय। आप सब दुनिया की सकारात्मकता को अनुभव कर सके बचा सके। और अगर आप अपने आप को इस प्रकार से अडॉप्ट कर लेंगे जिस प्रकार से हर विवो केवल घास खा सकता है। सम हाव समह, ही कैन, ओनली डाइजेस्ट पॉजिटिविटी एंड सक्सेस। और ऐसे व्यक्ति को जब आप देखोगे आप पाओगे। अरे इसके जीवन में तो सब अच्छा हो रहा है, अरे इसकी पत्नी तो इसको देख कर मुस्करा रही है। अरे इसके बच्चे तो कितने सफल हैं। अरे इसका शरीर तो कितना स्वस्थ है। अरे यह तो साधना में कितना गहरा जाता है। अरे ही हैज। एडेप्टेड बॉडी इन सच, ए ब्यूटीफुल ब्यूटिफुल, ओनली थिंग एक्सेप्ट सन डाइस ss रे।