ईशान शिवानंद tells Indian parents that shouting and physical punishment increase anxiety and make children feel inferior. Children need love, safety, and encouragement instead. He urges parents to affirm their children's potential with messages like 'you will succeed' and 'don't worry.'
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मेरी प्रार्थना सभी माता पिता से बच्चों के चीखने चिल्लाने से कुछ नहीं होता, बच्चों पर हाथ चलाने से कुछ नहीं होता, मैंने वेस्टन साइकोलोजी में बहुत काम किया और न जाने क्यों भारतीय माता पिता को लगता है की बच्चे जितना हम न देंगे, जितना 2 देंगे, जितना चीख देंगे, जितना उनको नीचा महसूस करा देंगे, कुछ बन जाएगा, कुछ नहीं बनेगा, वो उल्टा और रनआउट जायेंगे और एंग्जाइटी हो जाएगी। और तुम्हे क्या लगता है बच्चे को बुरा नहीं लग रहा, बच्चे पर खुद प्रेशर नहीं है, कोई तो 1 जगह हो जहाँ उसको प्रेम मिले, जहाँ उसको शांति मिले, जहाँ उसको सुख मिले, जहाँ उसको सेफ फील हो, और मैं हमेशा तुम्हारे बच्चों के लिए खड़ा हूँ, लेकिन क्या तुम मेरे साथ अपने बच्चों के लिए खड़े नहीं हो सकते? जहाँ दुनिया तुम्हारे बच्चों को चलने के लिए तैयार बैठी है, तब क्या तुम अपने बच्चों के हृदय को प्रेम, साहस और शक्ति से नहीं भर सकते? तुम्हें बस इतना कहना है, बेटा तुम सफल होगे, तुम मेहनत करो, बाबाजी लव, यू भैया लव, यू महादेव, तुम चिंता मत करो।