Ishan Shivaanand explains that ego blocks divine energy like rubber shoes block electrical current. Shed your ego, grasp every chance to chant or sing, sit straight, and loosen your attachments. Only the seeker and the guru matter.
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बाबा कहते हैं। इसलिए तुम्हारी जो परम स्थिति जो मूल प्रकृति है, वो है आनंद के उस मूल प्रकृति में लौटना। तुम्हारा धर्म है और सबसे सरल है उस मूल प्रकृति में लौटना कि जब कभी भी तुम्हें मंत्र उच्चारण करने का अवसर प्राप्त हो, भजन गाने का अवसर प्राप्त हो, तो तुम उस अफसर को इस प्रकार से जकड़ लेना, जिस प्रकार से रेगिस्तान में प्यासा पानी की बाटली को जकड़ता है। बिल्कुल सीधे बैठ जाएं, क्योंकि हीलिंग बाद में आएगी। पहले तो गुड कंडक्टर बनना सीख रहा होगा। तुम देखो, हमारे मंदिरों में सबसे पहले बाहर चप्पल उतारी जाती थी। अभी भी मंदिरों में चप्पल उतारते हैं। न चप्पल उतारना सबसे जरूरी है। क्योंकि यह चप्पल तुम्हारा अहंकार है। जब तक इस अहंकार, जब तक इस चप्पल को हमने पहना है, तब तक हम गुड कंडक्टर नहीं हो पाएंगे। तुम देखना, जब कभी भी बिजली का काम करते हो, चप्पल पहन के करते हो। क्यों? क्योंकि वो जो रबर की चप्पल है, वो तुम्हें और पृथ्वी के बीच में 1 दीवार उत्पन्न कर देती है। और उस दीवार के द्वारा तुम्हें उस विद्युत के प्रवाह का कोई अनुभव नहीं होता। इसलिए तुम्हारे घर में तुम्हारी माँ कहती थी, बिजली का काम करना है। चप्पल पहने। उसी प्रकार से जब तक तुम अहंकार की चप्पल पहने हुए हो, तुम संजीवनी के प्रवाह को भोग नहीं पाओगे। और जिस क्षण तुम इसको उतार के बाहर फेंकते हो, अपने आप तुम्हें इतनी जोर का झटका लगेगा कि ये कुर्सी भी तुम्हें संभाल नहीं पाएगी, जिसपर तुम बैठे हो। पक्का से पक्का 4 स्क्रू इसके तुम ढीले कर 2 लेकिन उसके लिए तुम्हें स्वयं को खोलना सीखना होगा। तुम्हें 1 बात स्वीकार करनी होगी कि यहाँ पे सिर्फ तुम और तुम्हारे गुरु की शक्तियां विराजमान है। तब तुम्हे ये चिंता नहीं होनी चाहिए कि मेरा बगल वाला मेरे बारे में क्या सोचेगा। बहुत समय से तुम इस समुदाय में अपने जीवन को व्यतीत कर रहे हो, लेकिन जान लेना 1 सिद्ध अकेले चलता है me।