जीवन ऊर्जा का सही उपयोग करना सीखें | ~ ईशान शिवानंद

Ishan Shivaanand explains that each person broadcasts an inner frequency that attracts matching energy, like a radio tuned to a specific station. Fears and phobias persist because logic can't reach a mismatched frequency. Meditation and conscious thought regulation shift your frequency to align with higher energy, without needing external change.
Chapters
तुम्हारे चारों तरफ अभी भी सभी शक्तियाँ हैं। और जिस प्रकार से तुम अपनी फ्रीक्वेंसी बदलते हो, उस प्रकार से तुम अपने चारो ओर जो शक्ति प्रवाहित है, उस 1 क्वालिटी ऑफ एनर्जी से जुड़ गए लाइक एनर्जी अट्रैक्ट्स लाइक जी। और इसलिए तुम देखना 1 ही घटना गठित हो रही होगी, लेकिन हर इंसान अलग रेडियो तो गाना भी अलग बजा रहा होगा। ऐसा नहीं है कि अगर तुम फलाने रेडियो स्टेशन के नीचे खड़े हो तो वही गाना बजेगा निर्भर करता है। रेडियो के ऊपर हर इंसान के भीतर अपना ही गाना बचता है। चाहे कोई भी घटना, 1 घटना, मैं बताता हूँ। तुम में से कुछ होंगे जो इस फ्रीक्वेंसी के साथ रेसोनेट कर रहे होंगे, ध्यान करेंगे, साधना करेंगे। तुम में से कुछ रेडियो ऐसे भी बैठे होंगे जिनकी फ्रीक्वेंसी रेजुलेट कर रही होगी। दुख के साथ, तो यहाँ भी बैठ के दुख दुख खेल रहे होंगे। तुम में से कुछ होंगे जो रेजुलेट कर रहे होंगे, कि हाय, ऐसी नहीं चलता, पंखा नहीं, चलता। अब उस रेडियो में से वही गाना बज रहा है। तुम में से कुछ रेडियो होगा जो बाहर जाके बोलेगा भोजन, स्वाद नहीं। वा जी, वा। तुम भोजन खाने आये हो यहाँ पर, पर, वही रेडियो, वही घटना फ्रीक्वेंसी अलग अलग, गाने अलग अलग। और इसलिए तुम देखो हर मनुष्य जो तुम्हें दिखता है, हर मनुष्य के लिए, उसकी बीमारी परम सच है, हर मनुष्य के लिए उसका दुख परम सच है। चाहे तुम समझाने की कोशिश करो, इस दुख में कोई तथ्य नहीं, वो नहीं समझेगा क्योंकि उसकी और तुम्हारी फ्रीक्वेंसी में भेद है। मैं 1 नौजवान से मिला उसको शार्क मछली का बहुत भय था। शार्क मछली उसको इतना भय था की जब वो 1 सुमिंग पुल में भी तैरता था तो उसको डर था, शार्क मछली न आ जाए। अब यहाँ पर। मैं उसको समझाऊं की अरे भैया की सुमिंग पूल में शार्क मछली कहाँ से आएगी? वो तो साल्टवाटर फिश है, ये फ्रेश वाटर है, वो भी क्लोरिन वाला, मछली डाल भी दे तो मर जाएगी। मैं उसको कितना भी तर्क दूँ, उस तर्क से उसको समझ नहीं आएगी। तुम ये भेद, ये शोध करके देखना। अगर तुम्हारी प्राण बल्ले को कोकरोज से डर लगता है, तुम्हें कोकरोज हाथ में लो अपनी प्राण बल्ले के सामने रखो समझाओ। और देखना वो इतनी गति से उच्चारण करेगी की तुम्हारे दोनों कानों के बीच में 1 छेद हो जाएगा। तब तुम कितना भी तर्क प्रदान करने की कोशिश करो कि यह कॉकरोज है, क्या करेगा ये तुम्हारा? तुम तो इतनी बड़ी हो, तुम्हारी। 1 उंगली इस कॉकरोज के साथ पुष्टि पी सकती है। तुम पैर तो रखो, तुम्हारी कमर नहीं, कमरा है, तुम्हारा पैर नहीं, बहुत विशाल प्रचंड है, तो किसके ऊपर पैर, वो नहीं जी है। और ये बहुत छोटे डर है। पर तुम किसी से बात करना, जो व्यक्ति डरता है उसको तुम तर्क नहीं दे सकते। उसकी फ्रीक्वेंसी अब उस क्वालिटी ऑफ एनर्जी के साथ रिजोनेट कर रही है। और शायद भय इतना जिस व्यक्ति को फोबिया है, अगर उसका फोबिया ज्यादा तुम ट्रिगर कर। 2 तो उसको मृत्यु भी हो सकती है। डर के मारे हृदय रुक सकता है, तुम नहीं समझ पाओगे। 1 व्यक्ति जिसको हाइड्रो फोबिया है जल का भय, तुम उसको जल में धकेल। 2 वो डर के ही मर जाएगा। तुम नहीं समझ सकते, लेकिन यह सच है क्यों? क्योंकि अब उसका रेडियो उस फ्रीक्वेंसी के साथ रेजुलेट कर रहा है। और जिस फ्रीक्वेंसी के साथ मैं रिजोनेट करूंगा, उस प्रकार के विचार, उस प्रकार के भाव, उस प्रकार की ऊर्जाएं, हर कण मेरे भीतर से प्रवाहित होंगी। और ये 1 बहुत लम्बा चक्र है। क्यूंकि जितना मैं नेगेटिविटी के साथ रेजुलेट करूंगा, उतनी नेगेटिविटी मेरे मुख, मेरे आचरण से निकलेगी, जितना निकलेगी उतना, और में नेगेटिविटी के साथ रेजुलेट करूंगा, और पूर्ण रपिजननपुर्णरपि। और इसलिए बहुत जरूरी है। बाबा कहते हैं कि रेडियो पर अगर तुम्हे भजन बजाना है, तुम्हे उसको हरिद्वार ऋषि केश ले जाने की जरूरत नहीं, तुम्हे उसकी फ्रीक्वेंसी बदलने की जरूरत है, क्योंकि फ्रीक्वेंसी बदल दोगे। जहाँ वो बैठा है, भजन, वहाँ बजना शुरू हो जाएगा, फ्रीक्वेंसी नहीं बदलोगे, तुम उसको रिशिकेश भी ले जाओ। वहाँ पर, वही गाना बजेगा, जो यहां बज रहा था। फ्रीक्वेंसी बदलना सर्वश्रेष्ठ, सर्वोपरि फ्रीक्वेंसी, जहाँ मैंने बदल दी, मेरा जीवन बदल जाएगा। और मेरे भीतर से, वो शिव, तत्व प्रवाहित होना शुरू हो जाए। वो शिव, तत्व जो अभी भी है, अभी भी, तुम्हारा भगवान हैं इस कमरे में, और ऐसा नहीं है कि तुमने ध्यान किया, तो वो आया, वो रहेगा, हमेशा है, जब तुम बहुत दुखी हो, उस कमरे में भी भगवान है। चाहे रेडियो पर कोई भी गाना बज रहा हो, हजार गाने अभी भी है। जब तुम सबसे ज्यादा प्रेम में हो, तभी भी दुख भी है। ऐसा नहीं है कि दुख कहीं चला गया, वो है resonate, इस आल, अबाउट रeजोनenitआल, अबाउट फ्रीक्वेंसी।










