शिवयोग कॉस्मिक साइंस क्या है? ~ ईशान शिवानंद

Ishan Shivānand explains Shiv Yoga as a path to divinity, using the river-to-ocean metaphor to show all spiritual routes lead to God. He emphasizes following a guru without distraction, warns that materialism and technology divert seekers, and claims Shiv Yogis are building a future Satya Yuga with India as the spiritual center.
Chapters
उस दिव्यता के बहुत सरल, बहुत अच्छे, बहुत स्वादिष्ट मार्ग भी है। देखो, हर नदी समुद्र तक जाती है, बोलो जाती है। हाँ, जी, नाच आदि कर्मानुसार, स्वादानुसार भावानुसार नदी चुनता है, कठिन नदी भी समुद्र तक लेकर जाएगी। लेकिन उस नदी में रहना बहुत कठिन हो जाएगा। 10 बार तुम्हारी नाव पटेगी, 10 बार तुम पत्थर पे जाके। लड़ मरोगे हो सकता है, घड़ियाल भी तुम्हे खा जाए।
और कुछ नदियाँ बहुत अच्छी होती है। कुछ नदियाँ बहुत प्रेम देते है, कुछ नदियाँ बहुत सुख दे थी। कुछ नदियों में।
हमारा नकारात्मक के प्रति विभस्त हमें भगवान को नहीं ले जा रहा है, बल्कि सकारात्मक के प्रति प्रेम हमें भगवान तक ले जा रहा है। इस बात को जिस दिन तुम समझ जाओगे, उस दिन तुम शिवयोग की इस
नदी को पूर्णता स्वीकार कर पाओगे।
जो सहेजी तुम्हें ले जाएगी। मंत्र मूलम, ये तुम्हारी सैनिटी के लिए है।
चाहे जो भी तुम्हारा गुरु हो, फिर तुम उसी की सुनना कोई पुराण मत सुन।
फिर तुम उसी मार्ग पर चलना, सुपर, नार्मल स्टीमर से नहीं भटकना। फिर तुम उसी दिव्यता को अपनाना।
क्योंकि तब तुम दुनिया के लिए नहीं जी रहे हो, तुम अपने लिए जी रहे हो, दुनिया के लिए तुम पैसा कमाते हो, अपने लिए तुम प्रेम स्वास, सुख, दिव्यता खुशी कमाते हो। और मजे की बात प्रेम कमाने के लिए तुम्हें पैसे की जरूरत नहीं। ये चीज मैंने अपने जीवन में सीखी। जब मेरा बच्चा पैदा हुआ, मात्र 1 डेढ़ साल का था। मैं बहुत महंगा, खिलौना लेकर के आया आया, लेकिन बस
फिर 1 दिन खिलौना
छोड़ मैं ही उसके साथ खेलने लगा। मैं उसके लिए गदा बना हो, मेरे ऊपर चढ़ा, बहुत देर तक कभी गदा
बना, कभी घोड़ा बना, जब थक गया तो घड़ियाल बना।
वह कितना अच्छा लगता है। मैं बोलता हूँ, तुम इमैजिन करते जा रहे हो।
जब और थक गया तो साफ बना,
फिर जब और थक गया तो लकड़ी
का टुकड़ा जो नदी में बह रहा है।
और उस दिन जो मेरे बच्चे को खुशी मिले, वो किसी खिलौने से कभी नहीं मिल सकती। हर चीज को कमाते, उसी चीज की करंसी से। और ये ज्ञान तुम्हें तब समझ आएगा, जिस दिन तुम इस बात को समझोगे आई, डिजर्व आये। और इसलिए कभी कभार कुछ लोग आकर मुझसे पूछते हैं या आप? योगी तो ऐसा क्यों
कि आप अपनी लुंगी छोड़ पतलून।
पहन दुनिया जहान की गवर्मेंट ऑफिस मैं, शिव योग की साधना को सिखाते हो। और मैं कहता हूँ, केवल केवल उस माँ के लिए जो अपने बच्चे को शिवयोगी बनाना चाहती है, लेकिन बच्चे के भीतर अपनी सभ्यता के लिए इतनी नफरत पैदा हो गयी है।
क्या?
वो कहता है? मुझे संत समझ, आने बंद हो गए
हैं
उस बच्चे के लिए। मैंने मेहनत की। क्यूँकि ताकि जब उसकी माँ, बोले, बेटा, शिव योग कर। और वो बोले, मुझे संत नहीं समझ आते। तो वो माँ, बोले, बेटा, जो संत तुझे समझ नहीं आ रहा न, वो संत गूगल को समझ आता है, उबल को समझ आता है, माइक्रोसॉफ्ट को समझ
आता है, फेसबुक को समझ आता है, दुनिया की हर गवर्नमेंट को समझ आता है।
हर यूनिवर्सिटी को मतलब जिस कंपनी के सामने तो कटोरा ले के 6 महीने
बाद खडा होने वाला है। न
वो कंपनी चोली फैलाए संत के सामने खड़ी है।
फिर शायद वो नौजवान अपनी माँ की
सुन के शिविर में बैठ जाए। तो देखो मुझे किसी कंपनी की नहीं पड़ी। मुझे उन शिवयोगी माओं की पडी है जिनकी मैं मदद करना चाहता हूँ ताकि मैं भी सुपर नार्मल स्टिमुल्स दोड़ सकू और 1 बार फिर दुनिया को सिखा सकूँ। जिस प्रकार से भारत के इतिहास का हृदय कलकत्ता है, उस प्रकार से दुनिया के इतिहास का हृदय भारत है। और हो ही जाएगा, जी हो ही रहा है। सोचो अभी तो सिर्फ मैं स्मार्ट पर हूँ, मेरे गुरु के साथ कितना अच्छा हो गया सोचो जिस दिन मैं और आप मिल जायेंगे, जुड़ जाएंगे तो कितना अच्छा हो जाएगा। तब सतयुग। इतिहास में तब सतयुग भविष्य है, जिसका निर्माण शिव योगी कर रहे हैं।
और फिर नौजवानों को समझ, आएगी साधना, फिर नौजवानों को समझ, आएगा सनातन, फिर उनको समझ आयेगा, हमारा धर्म क्यूँ क्यूँकि? हमारा फिर इकलौता धर्म होगा जो ये नहीं कह रहा, हमने यह किया था, हमने यह किया था, हमने ये किया था। बल्कि हमारा धर्म है, जो यह कह रहा है, हम ये करेंगे। इन फ्यूचर टेकनोलॉजी विल कम बैक।
the signs is not in the books, the science is what is happening today it is the since beyond, since the shiviogecosmick signs।










