Eeshan Shivanand explains that repeating the same actions won't change your results. To get different outcomes, you must change your actions, leave your comfort zone, and adopt new strategies. Simply changing your location won't help if your work stays the same.
Chapters
की 1 ही चीज को दोहराते रहो और अपेक्षा रखो के परिणाम में कोई अंतर होगा, ऐसा हो नहीं सकता। अगर परिणाम बदलना है तो कर्म बदलना होगा। हाँ जी। और अगर 1 ही कर्म रखोगे। और अपेक्षा रखोगे परिणाम बदलेगा तो तुम पागल हो। अगर कुछ ऐसा चाहते हो जो अभी तक जीवन में पाया नहीं, तो कुछ ऐसा करना होगा जो जीवन में आज तक किया नहीं, त अब तो पहुँच सकते हो। अगर कुछ ऐसा चाहते हो जो पाया नहीं, तो कोई ऐसी मेहनत करनी होगी जो अभी तक की ही नहीं, अपने आप को कंफर्ट जोन से बाहर निकालना होगा। लेकिन अगर घर में बैठ के रोये और कहा खुशी नहीं। और फिर मंदिर में बैठ के रोए और कहा खुशी नहीं, ऐसा क्यूँ नहीं। सिर्फ स्थान बदला है, कर्म तो नहीं बदला। फिर जो तिरिंग में चले गए, वहाँ पर रोली स्थान बदल कर तो नहीं बदला। और पागलपन का मतलब वही कर्म करो और परिणाम में कोई अंतर की अपेक्षा करो। ये पागलपन है।