Emotions always win | Prati Prasav Sadhna | @IshanShivanand

Prati Prasav Sadhna argues that emotion always defeats logic in human decision-making, using examples like a mother's unconditional praise and the airplane inventor's drive against skeptics. He traces modern skepticism to colonial education and advocates for spiritual practice to cultivate positive emotions that overcome both negativity and rational doubt.
Chapters
मनुष्य एकलौता जीवे जिसकी सेरेब्रल कोर्टेक्स और लिपिक सिस्टम के बीच सेग्रीगेशन है। कहने का मतलब मनुष्य एकलौता बीज जिसका तर्क अलग है, भाव अलग है। कहने का मतलब कि या तो तुम 1 समय पर किसी वस्तु के प्रति तर्क वितर्क कर सकते हो, या तुम किसी वस्तु के प्रति भावुक हो सकते हो। कहने का मतलब मनुष्य एकलौता जीव है जिसका भाव और तर्क में अगर कभी लड़ाई होती है तो भाव हमेशा जीतता है। कहने का मतलब कि अगर कभी तुम्हारे भाव और तर्क आमने सामने आई तो उसी समय तर्क हथियार डाल देगा और भाव की जीत होगी कभी तुम सोचना जब मुझे अपने सेल्फ कॉन्फिडेंस को जगाना होता है। मैं अपनी माँ के पास जाता और मैं पूछता हूँ माँ, मैं कैसा हूँ? और मेरी माँ, तू तो मेरा लाल, मेरा पीला, दुनिया का सबसे सुन्दर बच्चा और मुझे पता है सरासर झूठ है यह बात। लेकिन मेरी माँ का भाव है। अब तर्क में मैं कुछ भी बोलूं, तर्क में बोलने वाला बोले की इसका पेट देखो सिक्स पैक होनी चाहिए, इसकी तो ऑन पैक है, इसका रंग देखो फिर लवली लगना चाहिए। इसको तर्क वाला तो कुछ भी बोल देगा, लेकिन 1 माँ का भाव हमेशा उसके तर्क को हरा देता है। बोलो मानते हो, हाँ जी, ना जी, भाव हमेशा जीतेगा। और इसलिए जब ऋषि मुनियो ने भगवान के चित्र बनाये, कभी देखना माँ काली के नीचे भगवान शिव को डाल दिया। शिव क्या दर्शाता है तर्क लॉजिक, माँ, काली, क्या दर्शाती है? जब तुम्हारा भाव प्रचंड है तो तर्क खत्म है ही नहीं। भाव हमेशा तर्क को हरा देगा। और शिव योगी ये बात बहुत पहले समझ गए थे, बहुत पहले समझ गए कि पढाई लिखाई दिव्यता के बारे में बेकार है, केवल 1 ही चीज काम आएगी। और वो है भाव। तो उन्होंने 1 ही चीज सिखाई कि अगर भाव हमेशा तर्क पर हावी हो जाएगा, तो क्यों न हम 1 सकारात्मक भाव का निर्माण करे? क्योंकि देखो 1 बात, तो पक्की भाव हावी होगा, नकारात्मक, भाव भी तर्क पर हावी होगा। क्यों न हम सकारात्मक भाव का निर्माण करे? क्योंकि सकारात्मक भाव भी तर्क पर हावी हो जाएगा। और इसके भी कई उदाहरण हैं। जब 1 विज्ञानिक हवाई जहाज का इजाद करना चाहता था। सकारात्मक भाव है न, हवाई जहाज बनाऊंगा मैं, तो बना के रहूँगा। तुम्हें क्या लगता है? बहुत तर्कवान व्यक्ति उसके पास नहीं गए थे, कैसे उड़ेगा गए थे? न? हाँ जी, ना जी। लेकिन सकारात्मक भाव भी तर्क पर हावी हो जाता है। और उसने बना ही लिया, इजात कर ही लिया। अपने हवाई जांच कर। तुम्हे क्या लगता है, जब 1 शिव होगी, भगवान की राह में निकलता है, तो क्या उसको तर्कवान लोग नहीं मिलते? अरे कहाँ जा रहा है? क्या होता है, साधना कुछ नहीं होती। तुम्हें क्या लगता है ये तर्कवान लोग, गौतम, बुद्ध, मारकंडे, अष्टावक्र, इन सब के रास्ते में नहीं आये थे, आये थे। लेकिन जिसका सकारात्मक भाव है, उसके सामने भी ये तर्क फेल। क्यूँकी तर्क बना ही फ़ैल होने के लिए जिस चीज के प्रति भाव होगा, वही भाव जीतेगा, अब तुम्हे सोचना है कि तुम्हारे जीवन में कौन सा भाव प्रबल है, कौन सा भाव मात देगा तर्क को क्या ये भाव सकारात्मक होगा यार ये भाव नकारात्मक और ऐसा नहीं है। ये चीज शिवयोग को समझ आई। ये चीज पूरी दुनिया को समझ आ चुकी लॉजिक डजेंटवर्क क्यूंकि यहाँ की 1 यूनिवर्सिटी है वहाँ पर मैं साधना सिखा रहा था। 1 बच्ची खड़ी हुई मुझे कहती है भैया देखो देखो देखो आप positivity की बात कर रहे हो, but i m a realist, क्यूंकी मुझे cालीप्लावबनाने समझ नहीं आते ima realist, im very logical, आपका इसके बारे में क्या कहना है? मुझे उस बेचारी की ये बात सुन के उसे बहुत तरस आया क्योंकि आज की तारीख में जो रियलिस्ट कहते हैं, बेचारे वो ही रह जाते हैं, बाकी सब निकल जाते हैं, बाकी सब सफल हो जाते हैं। ये जो वो कह रही है, मैं रियलिस्ट हूँ वो रियलिस्ट नहीं है ये क्लयुनलाइजेशन का अभी तक उस पर प्रभाव है क्यूँकी गोरे ये सिखा कर के गए थे, जब भारत गुलाम था न तो हमें सिखाया गया था। जब हमने कहा कि हम तो सब दृश्यों की संतान है, हमें सिखाया मालिकों ने तुम कुछ नहीं हो, बी रियलिस्ट, कोई सदृश की संतान नहीं हो तुम। फिर हमने कहा सब दृश्यों को, हमारे पास सनातन है, वेद है, सुश्रुत संहिता है, हमारे पास गणित है। फिर हमें सिखाया गया कुछ नहीं है तुम्हारे पास ये सब कहानियाँ हैं? यू आर बी रियलिस्ट, बी रियलिस्ट, 1 हाथ में तुम्हारे पोछा है, 1 हाथ में झाड़ू बी रियलिस्ट 200 साल तक हमारे भीतर यह बात ठूंसी गयी, बी रियलिस्ट रियलिस्ट सपने देखना बंद कर 2 कितने साल हो गए हमें मुक्त हुए, हमारे देश को आजादी मिले लेकिन दिमाग अभी तक गुलाम रहे गया। और जो आदमी कहता रियलिस्ट वो केवल इतना कह रहा है कि मैं मैं सपने नहीं देखूंगा और जो व्यक्ति सपने नहीं देखेगा उसके सपने साकार कैसे होंगे out।










