Evolve towards a Better Future | Intensive Prati Prasav Sadhna - Mumbai | Ishan Shivanand

Ishan Shivanand teaches that most people repeat negative habits on autopilot. Real change comes through sadhana and Shivayog, which reprogram the mind, but lasting evolution requires seva: selfless service without expectation. When service becomes a habit, suffering shrinks and the heart fills with joy.
Chapters
ad, rakhna a picture, is worth the thousand words, you do not talk with words, you talk to the emotions, there not talking to a person, s mind, a talking to his sub concious, आदि। ज्यादा चीजें तुम्हारे साथ तुम्हारे जीवन में होती है, वो 1 चॉइस है ही नहीं, वो 1 प्रोग्रामिंग है। आदतन कर रहे हो, तुम जीवित जीवित हो ही नहीं। जैसे सपने में अपने आप चीजें घटित होती है। और तुम केवल दश्तभावमेंदेखते हो, वैसे इतने लोगों के साथ मैंने काम किया, वो भी आदतन दुखी हो जाते है, आदतन गुस्सा कर देते है, आदतन भयभीत हो जाते हैं और कुछ भी उनके हाथ में है ही नहीं, बस चले जा रहे हैं। और जब साधना में आते हैं, प्रति करते है, शिवयोग में करके उनकी जाक खुलती है। लेकिन जा की शुरुआत ही यहीं से है। तुम कीमत क्या अदा करोगे? यही तुम्हारी नई आदत, तुम्हारी पुरानी आदत से तुम्हें मुक्त कर सकती। दूसरी चीज क्या थी की इस प्राइस नई आदत का क्या निर्माण किया? तुमने आज और अगर नई आदत का निर्माण नहीं किया, उसको ताकत नहीं दी। जीवन बेकार है, तुम्हें सोचना होगा, लिखना होगा, यह सब कुछ जरूरी है। और तीसरी चीज जो तुम्हें लिखनी होगी, सेवा की। अगर मुझे भगवान से इतना सब कुछ मिल रहा है तो प्रकृति के प्रति मेरी सेवा क्या है? मेरे गुरु के प्रति मेरी सेवा क्या है? अगर जीवन में सेवा नहीं तो जीवन में खुशी नहीं। सेवा का मतलब क्या है कि तुम कुछ अच्छा कर रहे हो और प्रकृति तुम्हे देख के मुस्कुरा रही है, धन्यवाद कर रही हो। हम खुशी से। परे इतना क्यूँ है? क्यूँ अपने परिवार के लिए करते? हमें लगता है क्या वो हमारा धन्यवाद करेगा? क्या करेगा? परिवार जो परिवार के लिए कर रहे हैं, वो हमारा धर्म है, हमें करना पड़ेगा अपने बच्चे के लिए करो, अपने बच्चे को बोलो। फरामोश, तू खुश क्यों नहीं होता? 1 दिन बच्चा भी बोलेगा, तुम्हारा तो धर्म था, यह सब कुछ करना करो। तुम अपनी पत्नी को कोई अच्छा बोलोगे और फिर बोलोगे मैंने तुम्हारे लिए इतना किया, धन्यवाद कहा है? पत्नी भी बोलेंगे, अरे, तुम तो केवल दफ्तर चले गए, तुम्हारे बच्चे मैंने, पहले तुम्हारे कपडे मैंने? धोए, तुम्हारा खाना मैंने बनाया और तुम्हारी माँ। तुम्हें मेरा धन्यवाद करना चाहिए। तो बोल या देवी, सर्वभू शो। और फिर तुम्हारे भीतर यह छेद रह जाएगा। और जब तक यह छेद है तो खुशी आएगी नहीं। तुम्हे कुछ ऐसा करना पड़ेगा किसी के लिए जिसको करने की तुम्हे जरुरत नहीं है, इसी को सेवा कहते हैं। कुछ ऐसा अच्छा करना जिसको करने की तुम्हें जरूरत नहीं है। लेकिन तुम करते हो मेरे गुरु ने तुम्हे सेवा के बहुत मौके दिए, 1 सेवा का मौका दिया, फूल कोई जरूरत नहीं। तुम्हें अपने घर में फोरम चलाने की। लेकिन अगर तुम चलते हो, तुम सेवा कर रहे हो, शिवयोग और फोरम चलाना भी आसान नहीं, हर वीकेंड तुम अपने कमरे तैयार करते हो, साफ़ सुथरे करते हो, गुरु का आवाहन करते हो और फिर शिव होगी आ रहे हैं, तो सुबह से ही तुम्हें पकोड़े भी तलने पड़ते हैं क्यों क्यूंकि भूखे आयेंगे, अपेक्षा होगी, पोरम चलाते हो, उनको परोठे खिलाते हो, उनसे बातचीत करते हो, सेवा तो कर रहे हो, हाँ जी, ना जी, ऐसी सेवा कर रहे हो की भगवान शिव शिवा भी तुम्हें देख जोर तह दिल से तुम्हारा धन्यवाद कर रहे हो और तुम्हें ये सब करने की जरूरत नहीं और तुम कर रहे हो इसलिए सेवा इसलिए इसलिए तुम्हारा हृदय खुश हो जाता है, प्रफुल्लित हो जाता है। जिस व्यक्ति के जीवन में सेवा होगी, उसी के जीवन में खुशी होगी, जिस व्यक्ति के जीवन में सेवा नहीं, उस व्यक्ति का जीवन है सामान उसने पेट्रोल की जगह पानी डाल दिया और अपेक्षा रख रहा है कि गाड़ी, चले, चाहे कुछ भी सेवा हो, कभी कबार किसी को माफ़ करना भी सेवा है, कभी कबार चिड़िया को थोड़ा दाना डाल देना ही सेवा है, कभी कबार गुरु के ज्ञान को आगे फैलाना ही सेवा है क्योंकि बहुत बार जब तुम किसी दुखी व्यक्ति की सहायता करते हो तो तुम्हें अपने दुख बहुत छोटे लगने शुरू हो जाते जो व्यक्ति लालची है, केवल अपने लिए प्रार्थना करता है, वो व्यक्ति हमेशा अपने दुख को बढ़ा, चढ़ा के भगवान को पेश करेगा और जितना अपने दुख को बढ़ाएगा फिर उसके मन को भी लगना शुरू हो जायेगा मेरा दुख तो इतना है कि यह दुखी मेरे पतन का कारण बनेगा और जब हम अपने ही दुख को ओवर सेल्फ करना शुरू हो जाते तब वो दुख एक्शन का कारण बनता है और जब हम दूसरों की सहायता करते, दूसरों का मार्गदर्शन करते, दूसरों का हाथ था, उनको शिवयोग दिव्यता की ओर लेकर के जाते हैं तो अपने आप अपने दुख बहुत छोटे लगने शुरू हो जाते हैं अपने आप मन को ताकत मिलती है तो दुख बहुत छोटा है इसको तो बहुत आसानी से मैं अपने भीतर से बाहर निकाल फेंक सकता हूँ और ऐसा व्यक्ति के जीवन में कोई भी घटना घटित हो वो एवोलुशन का कारण बनती, विकास का कारण बनती।










