ईशान शिवानंद explains that the energy composing all beings is eternal and never dies, only transforms. Your soul has lived countless lifetimes as kings, servants, leaves, and butterflies, witnessing Lord Rama, Krishna, and Shiva. All joys and sorrows from these lives are encoded in your DNA, and your present pain is just another transformation of the same eternal energy.
Chapters
तुम्हारा 11 सेल है। न जाने कितने भगवान राम को देखा है, न जाने कितने भगवान कृष्ण को देखा है। तुम्हारे 11 बाल ने क्यूँ क्यूंकि उर्जा, कभी मरती नहीं उर्जा, सिर्फ परिवर्तित होती और जिस उर्जा के तुम बने हो, वो ही उर्जा। इस ब्रह्माण में अनंत काल से चलती आ रही है। तो तुम आज की तारीख में कहते हो मुझे भगवान के दर्शन चाहिए। लेकिन तुम्हारे नेत्रों के भीतर की ऊर्जा अनंत काल से चलती आ रही है। उसने भगवान शिव को भी देखा है, उसने भगवान कृष्ण की लीलाओं को भी देखा है, उसने महिषासुर का संहार भी देखा है। उसने न जाने कितने जीवन और मृत्यु अनुभव किए हैं। तुम्हारे 11 कर, न जाने कितनी बार तुम किसी के माता बने, न जाने कितनी बार तुम किसी के पिता बने। और ये सब कुछ तुम्हारे अंतर्मन ने, तुम्हारे दिव्य स्वरुप ने अनुभव किया है। न जाने कितनी बार तुम पुत्र पुत्री बने, न जाने कितनी बार जितने अनुभव यह संसार दे सकता है। तुम अनंत बार ये सारे अनुभव अनुभव कर चुके क्योंकि ऊर्जा कभी मरती नहीं। कभी तुम 1 राजा के मुकुट में भी थे, कभी तुम 1 बिहारी के बर्तन में भी थे, कभी तुम 1 वृक्ष की पत्ती भी रह चुके हो, कभी तुम 1 तितली के पंख में रह चुके हो। और ये सब अनुभव तुम अनुभव कर चुके हो। जितना सुख यह प्रथ्वी प्रदान कर सकती है, तुमने प्राप्त किया है, जितना दुख यह प्रदान कर सकती है, वो भी तुमने प्राप्त किया है। और वो सब कुछ तुम्हारे डी एन ए में एन्कोडेड है, वो सारा, ज्ञान, वो सारी शक्तियाँ, वो सारा, तब तुम्हारे दिव्य स्वरुप में एनकोडेड है और तुम्हारा दिव्य स्वरुप हर ष दृष्टाभाव से तुम्हें देखता रहता है। और मजे की बात तो है की तुम्हारा फिर इस बार जन्म हुआ, तुमने फिर इस बार सुख और दुख को भोगा, तुम फिर इस बार दुख में व्याकुल हुए, सुख में अनंत प्रेम को तुमने अनुभव किया और हर बार जब तुम्हें कोई अनुभूति हुई, तुम्हें लगा वाह ये तो मेरे साथ पहली बार हो रहा है। मजे की बात ये है इस ब्रह्माण में तुम किसी भी दुखी व्यक्ति से बात करो, हर दुखी को यही लगता है कि मुझसे ज्यादा दुखी इस ब्रह्माण्ड में कोई भी नहीं बोलो मानते हो। हाँ जी नाजी, हर दुखी को लगता है मेरी बीमारी सर्वोपरी, मेरा दुख सर्वोपरी, लेकिन वो ये नहीं जानता कि वो चाहे कितना भी व्याकुल हो जाए उसके अंतरमन में सारा ज्ञान छिपा बैठा है।