Ishan Shivanananda explains two kinds of knowledge for life's purpose: building self-respect by recognizing yourself as born from Shiva, and trusting your guru's guidance like a GPS instead of getting lost in external information. True success means healthy love, divinity, and continuous growth through pain as a teacher, not just chasing money.
Chapters
आज से याद रखना कई प्रकार के ज्ञान हैं कलयुग में, ज्यादातर ज्ञान कोई पुराण है और सुपर नार्मल स्टिमुलस कई प्रकार के प्रोडक्ट हैं और ये प्रोडक्ट केवल स्वाद रखते हैं, पोषण नहीं इस कलयुग में उपाय केवल 2 पहला याद रखो, आय रिसर अगर तुम्हें लगेगा कि तुम शिव से जन्मे शिव में लौटोगे तो तुम्हे अपनी इज्जत होगी और अगर अपनी इज्जत होगी तो तुम्हे ऐसे महल का निर्माण करोगे 1 ऐसा महल तुम्हारे मन में, तुम्हारे शरीर में, जिसमें तुम्हारी आत्मा, इस प्रकार से जीवन को जीएगी जिसमे हर्षण हरक शिवमय हो रहा है अगर तुम्हे लेकर गया कि तुम रिजर्व तो तुम केवल पैसा नहीं, कमाओगे पैसा, कमाओगे खूब, कमाओ चाहता, खरबपति बना लेकिन सफल कौन जो पैसे के साथ साथ स्वस्थ प्रेम दिव्यता भी कमाए है जी ना जी, दूसरा उपाय इतना ज्ञान है कि ज्ञान में खो जाना बहुत आसान है और न जाने वो ज्ञान कोई पुराण है यह क्या है और इसलिए मंत्र मूलम गुरुवाक्य, मुक् मूल गुरु कृपा की यह ज्ञान मेरा है, ये रास्ता मेरा है और 1 बार जब तुम ने जी पी एस में लोकेशन डाल डाली, फिर तुम जीपीएस को ट्रस्ट करते हो, करते हो, नहीं करते जब जीपीएस के, तब तुम थोड़ी ये राइट लेकर देखे, तब तुम जीपीएस को खूब अच्छे से ट्रस्ट कर डालते हो तो 1 दिन ऐसा आएगा जब तुम्हे देवता को भी ट्रस्ट करना सीखना होगा अब अपने मार्ग पर चलते जाना याद रखना, शिवयोगी के साथ अच्छा ही होगा और जो हो रहा है याद रखना कुछ सीखना है, सीख जाओगे बढ़ जाओगे शिवयोग में, तो मेरे गुरु ने बताया कष्ट बुरा नहीं है अगर आग में तुम्हारा हाथ टल गया, पीड़ा हुई क्यों, क्योंकि पीड़ा बताती है आग से हाथ हटा लो, अगर पीड़ा नहीं होती तो तुम्हारे हाथ का कबाब बन जाता है जी ना जी और अगर कोई कहे मैं तो नहीं हटाता आग से हाथ पीड़ा हटा 2 बाबाजी बाबाजी कहते बंदर की पूंछ कहां से आ गया तो पे अगर जीवन में कोई परिणाम है क्योंकि प्रक्रिया गलत है अगर परिणाम बदलना चाहते और प्रक्रिया नहीं बदलते तो यह पागलपन है, प्रक्रिया को बदलना होगा पीड़ा से कुछ सिखाना चाहती है मैं विकास लेकर के आऊँ, जीवन में विकास ले कर के आऊँ, सोच में विकास लेकर के आओ, साधना में विकास लेकर के आऊँ और फिर तुम्हारा जीवन केवल इसलिए नहीं होगा कि मैं पीड़ा से बचता, फिरू बल्कि इसलिए होगा कि शिव योग का बीज कहाँ कहाँ बोदू अब तुम आदर कर रहे हो अपने पूर्वजों का और आज की तारीख में बहुत जरूरत है तुम्हारे, इसलिए पीड़ा भी हो, धन्यवाद अच्छा है सुई बनके आई तलवार बन के आती, तो क्या होता अभी मैं सीख जाऊ जाऊ ab viksit ho jao everything that happens in my life is the power to evolve me और गुरु की देख रेख में थोड़ा और इवॉल्व हो जाऊँ, थोड़ा और उठ जाऊँ।