Ishan Shivananand compares saints and scientists as equally obsessed with invisible dreams. Both abandon comfort to chase what they cannot see: God or a hypothesis. Kabir, Meerabai, and Chaitanya Mahaprabhu kept going after failure. Faith and relentless effort turn intangible dreams into reality.
Chapters
हर 1 वैज्ञानिक और 1 सिद्ध में अगर तुम देखो वाट इस सिमिलर तो मैं बताता हूँ वाट इस सिमिलर बिटवीन सेंट एंड साइंटिस्ट इस दे। बोर्ड आर मैड दोनों पागल है और पागलपन का मतलब क्या होता है कि दोनों संत और वैज्ञानिक 1 सपने के पीछे भाग रहे हैं। सपने का मतलब जो इन्टेंजिबल है, सपने का मतलब जिसका कोई तथ्य नहीं, जिसको छुआ नहीं जा सकता। 1 संत ने सपना देख लिया की मैं भगवान को प्राप्त और वो उस सपने में इतना पागल हो जाता है कि वो जंगल में चल दिया है। ऐश्वरा राम छोड़ दे सब कुछ छोड़ के दिन और रात अपने सपने को सोचता रहता है कि मैं प्राप्त करूँगा। किसी ने भगवान को नहीं देखा और शैतान बार बार आयेगा तो कहा भगवान के पीछे भागता है, किसी ने देखा है क्या? कौन जानता है भगवान को? भगवान तो कहानी है? भगवान तो मेटाफर है, शिव कहाँ रहे होंगे? ये तो सिर्फ कहानियाँ हैं? तुझे कुछ सिखाने के लिए तू लौट जा लेकिन वो संत लगा रहता है, लगा रहता है, पागल पन है भीतर पागल पन है, बाबा कहता है वो पागलपन तुम्हें भी अपने भीतर लाना होगा। वो विश्वास कि मेरे जीवन में 1 बदलाव आएगा, न जाने कितनी रुकावटें संत के मार्ग में आती, लेकिन उसने सोच कर रखा है। 1 भगवान जिसको किसी ने देखा नहीं, मैं प्राप्त और वो कर भी लेता है और वहीं 1 वैज्ञानिक तुम 1 वैज्ञानिक को देखो, वो भी 11 आइडिया 1 हाइपोटसिस सोच लेता है। सोच लिया तो सोच लिया बस जैसा। 1 संत पागल पन उत्पन करके उस आइडिया के पीछे भागता है कि भगवान हैं वैसा 1 वैज्ञानिक भागता है। मैं प्रोफेसर की बात नहीं कर रहा हूँ, मैं वैज्ञानिक की बात कर रहा हूँ। आविष्कारी अब एडिशन नहीं सोचता कि मैं बल बनाऊंगा बना पाऊँगा या नहीं। चाहे 3000 बार मुझे गिरना भी पड़े मैं फिर खड़े होंगा, फिर भागूंगा कबीर के समान, चाहे कितनी भी बार मुझे गिरना पड़े मैं फिर उठूंगा चैतन्य महाप्रभु के समान, मीरा बाई के समान। वैज्ञानिक भी लगा रहता है, लगा रहता है, लगा रहता है और 1 दिन वो भी अपने स्वप्न को पदार्थ का स्वरूप प्रदान करता है। इतिहास गवाह है।